... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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लेखक परिचय

कामिनी कामायनी

जैसा कि सभी संवेदन शील प्राणी के साथ होता रहा है । जो बात मुझे सही नहीं लगती थी ,बचपन से ही मैं उसके विरोध में मुंह खोलने लगी थी । मेरे पढ़ने की आदत ने मेरे विचार को और भी परिमार्जित करना प्रारम्भ कर दिया था । घर परिवार , ,विद्यालय ,विश्वविद्यालय तक कहीं भी कभी भी मैंने अपने लिए दोहरे मापदंड नहीं गढ़े। जैसी हूँ जो हूँ ,वो हूँ । ,सुकरात ,मार्क्स ,हीगेल ,सिगमंड फ्रायड से विशेष रूप से प्रभावित रही । फीडेल कास्त्रों,ज्यां पाल सात्र,जैसी विचार धारा अच्छी लगी ,और अच्छा लगा साहित्य के लिए प्रस्तुत विशाल क्षितिज पर उड़ान भरते हुए नव नव पाखियों का कलरव गान । हर कंठ में एक नवीन ध्वनि  है ,एक नई नई चेतना ,एक नई ऊर्जा से भरा समाज हमेशा एक प्रबल और प्रबुद्ध साहित्य को जन्म देता रहेगा ।

 

 आकाशवाणी दिल्ली से लंबे समय तक संबद्ध ,अनेकों पत्र पत्रिकाओं मे आलेख प्रकाशित ,इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिंदुइजम मे योगदान , कुछ पुस्तकें प्रकाशित । अनेक देशों की यात्रा ,संस्मरण प्रकाशन के कगार पर ।

 प्रकाशन

·       1 भारतीय जीवन मूल्य ,प्रभात प्रकाशन दिल्ली ।

2 प्रत्यंचा {हिन्दी काव्य संग्रह ,अनुराधा प्रकाशन दिल्ली }

3 उपालंभ {मैथिली काव्य ,अनुराधा प्रकाशन दिल्ली }

4 कबीर काने क {मैथिली कहानी संग्रह ,अनुराधा प्रकाशन दिल्ली “

5 लाल काकी  {मैथिली कहानी संग्रह ,अनुराधा प्रकाशन दिल्ली , }

,6 लखिमा ठकुराइन मैथिली