परमादरणीय कोरोना!

पाय लागूं!

वैसे तो अब दुनिया से पाती लिखने का रिवाज उठ चुका है, पर फिर भी मैं तुझे पाती लिख रहा हूं। हालांकि हाथ से लिखना कभी का भूल चुका हूं।

डियर कोरोना! अब तो शांत हो जा।  बहुत गुस्सा हो लिया। सबको अब पता चल गया कि तू चीन से महान है। जिसने तुझे जन्म दिया तूने उसे भी नहीं बख्शा। अब...

कल महामारी के दिनों में  सूत्र में आपने अशोक गौतम का लिखा गाँव-शहर के बाहर के हाल पर विवरण पढ़ा था. आज उसी लेख के क्रम में प्रस्तुत है कहानी बापू खुश है

इसी शहर से सटे अनेकों गावों में से एक गांव में पचहत्तर साल का सरनिया मिस्त्री अपने मानसिक रूप से कमजोर चालीस साल लड़के मनोज के साथ अपने बाप दादा के स...

हालांकि महामारी के डर से सहमने तो लोग तब से ही लग गए थे, जब से वे बाहर के देशों में इस महामारी से हो रही मौतों में लगातार होते इजाफे के बारे में पढ़, सुन, देख रहे थे। पर फिर भी अधिकतर इस बात से संतुष्ट थे कि अपने यहां ऐसा वैसा कुछ नहीं। धीरे-धीरे इस बात की अफवाह शहर के लोगों के बीच अफवाह फैल गई जो बा...

रोज दिन को जब बड़े डाकखाने से पंचायत के ब्रांच पोस्ट ऑफिस में डाकिया डाक का थैला लाता था तो वह  बाजार के आसपास के अखबार शौकीनों को पांच सात अखबार भी ले आता था। उसमें चार पांच हिंदी पढ़ने वालों के होते तो एक दो अंग्रेजी के स्कूल के मास्टरों के। आसपास के गांवों में पांच-पांच सात-सात पास फेल पढ़े तो थे, प...

Please reload

eKalpana literary magazine

​​Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

सभी रचनाएं
ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें
Please reload

लेखकों के लिये सूचना

 

अक्टूबर में “पाँच कहानियाँ” का तेईसवाँ अंक प्रकाशित होने वाला है. उसके लिये अपनी सबसे बेहतरीन अप्रकाशित कहानी भेजिये. 

यदि आपकी कहानी “पाँच कहानियाँ” के लिये पसंद आई, तो रचना के लिये लेखक को ₹ 2000 का

मानदेय मिलेगा.

कहानी भेजने की आखिरी तिथि 14 अक्टूबर 2020 है.

कहानी यूनीकोड में हो, pdf format में न हो, ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें

Please reload

... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ई-मेल में सूचनाएं, पत्रिका व कहानी पाने के लिये सब्स्क्राइब करें (यह निःशुल्क है)