माँ की महिमा का क्या बखान करूँ?

क्या लिखूं?किन शब्दों में बयां करूँ?

देवगण भी माँ की सेवा करते हैं

स्वर्ग से बढ़कर सुख

माँ की आँचल में पाते हैं

माँ की आशीष जो मिल जाए

सारी दुर्गुण, असफलता दूर हो जाए

माँ को रुलाकर

जो भगवती की आराधना करते है

सच मे,माँ भगवती की

आशीष से वंचित रह जाते है

माँ की महिमा ही कुछ ऐसा है

सन...

जिंदगी में कभी ऐसी मोड़े आती हैं

बीते हुए पल यादें बनकर रह जाती हैं

दिल में एक कसक सी उठती हैं

उस कसक में अपनों की यादे आती हैं

अपनों से मिलना और

अपनों से बिछड़ना

जिंदगी की एक परिभाषा है

यादें इस परिभाषा को

नवीन कर जाती हैं

जिंदगी में तो बहुत कुछ

हम खोते पाते हैं, लेकिन

यादें तो बस यादें बनकर रह जाती है

    :कुमा...

 क्या लिखूँ?कैसे लिखूँ?

कुछ शब्द ही नहीं मिल पा रहे हैं

नारी शक्ति की सम्मान में

अल्फाज ही नहीं 

निकल रहे हैं

जी हाँ, नारी,शक्ति ही तो हैं

जो घर और ऑफिस

दोनों संभाला करती हैं

थके होने के बावजूद भी

काम किया करती हैं

नारी शक्ति से ही तो

घर स्वर्ग बनता है

इनके पलभर चले जाने से

सन्नाटा सा आ जाता है

आज की नारियां अब

अब...

हा, मैं लड़की हूँ
निडर और प्रतिभावान हूँ
इस समाज के लिए प्रतिष्ठा हूँ
ईश्वर की वरदान भी हूँ
हा, मैं लड़की हूँ
विद्या मेरा सिंगार है
अस्मिता ही मेरी वस्त्र है
समाज की रूढ़िवादी जंजीरों
से मुक्त हूँ
हा, मैं लड़की हूँ
लता मंगेशकर बनकर मैंने
दुनिया को संगीत दिया
तो बनकर हिमादास मैंने
भारत को स्वर्ण पदक दिया
...

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