दो पुरुष थे. दोनों ही आपस में घनिष्ठ मित्र थे. दोनों ही शादीशुदा थे और उनकी पत्नियां भी आपस में मित्र थीं. उन सभी का एक दूसरे के घर में आना-जाना था.

दोनों पुरुष अलग-अलग ऑफिस में कार्य करते थे, परन्तु दोनों बिना नागा शाम को मिला करते थे. एक दूसरे से सुख-दुःख की बातें करते और फिर अपने-अपने घर चले जाते.

...

बड़ी लम्बी रात थी वह. कटती ही न थी. अलाव की आग भी बुझती जा रही थी. आंखों में नींद भी नहीं आ रही थी और अंधेरा अपने भयावह रूप को और अधिक भयावह और विकराल करता जा रहा था.

वह दो लोग थे, जगन और राम मूरत. जगन जवान था और राम मूरत बूढ़ा, परन्तु उनके सुख-दुख इतने साझे थे कि उम्र का उनके बीच कोई भेद न था. उन के घ...

पिछले कुछ दिनों से यह उसकी नियमित दिनचर्या थी. शाम को कार्यालय से निकलने के बाद वह सामने वाले पार्क में जाकर कोने की एक बेंच पर बैठ जाता था और वहाँ टहलने वाले भांति-भांति के तथा हर उम्र के नर-नारियों की गतिविधियों को बड़े ध्यान से देखा करता था. इस क्रिया से उसके मन को बड़ा सुकून प्राप्त होता था और सुब...

मैं गली नं. तीन हूँ. दिल्ली के मोहल्लों की बहुत सारी गलियाँ नाम से नहीं संख्या से जानी जाती हैं. मैं पूर्वी दिल्ली के एक बड़े मोहल्ले लक्ष्मी नगर के एक बहुत छोटे उप-मोहल्ले कुन्दन-नगर की गली नं. 3 हूँ. यह मोहल्ला दो तरफ से बैंक एन्क्लेव से घिरा हुआ है. एक कोने में लवली पब्लिक स्कूल है तथा उसी से जुड़ा...

Please reload

eKalpana literary magazine

​​Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

सभी रचनाएं
ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें
Please reload

लेखकों के लिये सूचना

 

अक्टूबर में “पाँच कहानियाँ” का तेईसवाँ अंक प्रकाशित होने वाला है. उसके लिये अपनी सबसे बेहतरीन अप्रकाशित कहानी भेजिये. 

यदि आपकी कहानी “पाँच कहानियाँ” के लिये पसंद आई, तो रचना के लिये लेखक को ₹ 2000 का

मानदेय मिलेगा.

कहानी भेजने की आखिरी तिथि 14 अक्टूबर 2020 है.

कहानी यूनीकोड में हो, pdf format में न हो, ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें

Please reload

... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ई-मेल में सूचनाएं, पत्रिका व कहानी पाने के लिये सब्स्क्राइब करें (यह निःशुल्क है)