बैंड बाजे की ढम-ढम का शोर सुबह की गुनगुनी धूप से ही शुरू हो चुका था. सभी तरफ पायल और चूड़ियों की खनक हंसी ठिठोली की आवाजों से सारा माहौल एक खुशनुमा वातावरण का एहसास करा रहा था. विध्या ने अलसाये मन से खिड़की का पर्दा लगाकर सोने की कोशिश की. लेकिन अब नींद कहां आंखों में आ रही थी. मोगरे और सेंट की खुशब...

रिमझिम बारिश की फुहारों ने मौसम को खुशनुमा बना दिया था.बीना इस खुशनुमा मौसम को देख सुखद अनुभूति महसूस कर रही थीं.तभी बीना
की नजर खिड़की पर पड़ी. खिड़की से आती बारिश की फ़ुहारों को देख बीना खिड़की बंद करने लगी.तभी बीना की नजर सामने से आती 70 साल की बुजुर्ग महिला पर पड़ी.वह अकेली ही चली आ रही थी.भीगी ह...

वन्दना पुणतांबेकर

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