हे दीप ! तू कितना सौभाग्यशाली है 

घोर अंधेरे से तू बड़ा ही बलशाली है !

शत - शत नमन  तेरे त्याग साहस को

तेरे कारण काली रात भी उजाली है !

विशाल शुक्ल

                              साहित्यकार

                              रेलवे स्टेशन...

गॉव रिहावली - आगरा | गुरूपूर्णिमा के पावनपर्व पर बृजलोक साहित्य-कला-संस्कृति अकादमी ने के. जी. पब्लिक स्कूल, ग्राम रिहावली के सभागार में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों का सम्मान किया |

          इसके साथ ही छात्र - छात्राओं को ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय की तरफ से सत् साहित्य पूर्णतः नि:शुल्क भेंट कि...

कुछ दिन पहले इस किताब में, महक रहे थे बरक नये

जिल्दसाज तुम बतलाओ, वे सफे सुनहरे किधर गये

जहाँ इत्र की महक रवां थी,जलने की बू आती है

दहशत वाले बादल कैसे,आसमान में पसर गये

बूढ़ा होकर इंकलाब क्यों, लगा चापलूसी करने

कलमों को चाकू होना था, क्यों चमच्च में बदल गये

बंधे रहेंगे सब किताब में, मजबूती के धागे से

एक तम...

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