कभी कभी मन में आता है कि, शांति से पूछूं तुमसे हे भगवान,

हम तो चला रहे थे ज़िन्दगी, कर के बस जैसे तैसे काम,

कुछ गलती हो गई क्या हमसे, कि तुम तो रूठ ही गए भगवान,

बता दीजिये सीधे से कि चाहिए क्या तुमको भगवान..

कहीं कोरोना का क़हर, कहीं अम्फन का त्राहिमाम,

एक तरफ टिड्डो से बचें, तो एक तरफ भवंडर निसर्ग महान,

एक...

घर छोड़ के निकले थे तुम, कुछ काम और नाम बनाने को,
शहर ने बेवक़्त बेबस कर दिया तुम्हे, अपनी किस्मत आज़माने को..

अब घर सुरक्षित जल्दी पहुँचो, वापिस कतई ना आना,
शहरी ज़रूरतमंदो को, अपना हुनर फिर ना दिखाना..

ना छोड़ना अपने परिवार को, किसी और के भरोसे,
नहीं मिलता शहर में कोई, जो प्यार से खाना भी परोसे..

गाँव है...

चलते चलते रुक गया मैं,

रास्ते के पिछले मोड़ पर कुछ आहट सी आ रही थी शायद..

दिन के सन्नाटे में वह मील का पत्थर कुछ कह रहा था,

उसने कई दिनों से कोई हलचल नहीं सुनी थी..

ना कोई गाड़ियों की थरथराहट,

नाही किसी सूखे पत्ते की चरचराहट,

ना कोई बच्चो की टोली,

नाही कोई पंछी की बोली,

ना सामने के खेत में कोई किसान,

ना कोई बर...

मत कर खुद पर इतना गुमाँ ऐ ‘ज़िन्दगी’,

तेरा कहीं ना कोई निशाँ रह जाएगा..

ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा,

ज़मीन का कुछ टुकड़ा, या शेष बस राख रह जाएगा ..

नजाने किस वक़्त, ये वक़्त थम जाए,

और वह वक़्त, हमें कुछ सिखला जाएगा..

हस्ते मुस्कुराते जी लेते कुछ पल,

इस्के इलावा कमबख्त, कुछ ना हासिल हो पायेगा ..

'ज़िन्दगी' किसी एक पल,...

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