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माना कि बहुत सुन्दर हो, अद्भुत और आकर्षक भी,

मेरे भावों के उद्वेग को झेलना आता है तुम्हें।

कभी प्रतिकार नहीं बल्कि हमेशा दिया साथ ही,

तुम में भरी है रंगीनियत,नीलाभ सा अंतर्मन।

कोई जितना चाहे रंग बिखेरे, तुम्हारा है खुला निमंत्रण।

मेरे मन के भाव बखूबी बयां होते तुमसे,

कोई कितनी भी कोशिश कर ले,

तुम पर है मे...

October 26, 2019

रोशन करो तुम इस जग को इतना 

कोई दर तिमिर से ढका रह न पाए 

 दीपों की माला सजे द्वार सबके  

 अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए 

स्नेह से पूरित हो जीवन की बाती 

द्वेषों की आँधी बुझाने न पाए 

सुरीली हो सरगम सुप्रीत इतनी 

वितृष्णा के स्वर इसमें मिलने न पाएं 

निर्मल हो यह मन नदिया के जैसे 

सागर सा ख़ारा यह...

जगमग रोशन हो हर घर

मिले नव आशा 

खील-बतासा 

दीपोत्सव का त्यौहार 

पावनपर्व दीपावली |

फसलों से महका है परिवेश 

कृषक भाग्य जगे 

नई उमंग, नई तरंग 

थोड़े से पटाखे 

बस थोड़ी सी आतिशबाजी 

दीपोत्सव का त्यौहार 

पावनपर्व दीपावली |

प्यार-स्नेह से मिलो गले 

बहे मंद-मंद शीतल समीर 

करो नव सृजन देती यही संदेश 

नूतन संकल्प लेकर मन...

1. सूरज चमको न!

सूरज चमको न

अँधकार भरे दिलों में

चमको न सूरज

उदासी भरे बिलों में

सूरज चमको न

डबडबाई आँखों पर

चमको न सूरज

गीली पाँखों पर

सूरज चमको न

बीमार शहर पर

चमको न सूरज

आर्द्र पहर पर

सूरज चमको न

अफ़ग़ानिस्तान की अंतहीन रात पर

चमको न सूरज

बुझे सीरिया और ईराक़ पर

जगमगाते पल के लिए

अरुणाई भरे कल के लिए

सूरज चमको न

आज

2...



नशा नाश का जड़ है प्यारे , इसको मत अपनाओ ।
स्वस्थ अगर रहना चाहो तो , सादा भोजन खाओ ।।

इज्जत पैसा दोनों होते , एक साथ बर्बादी ।
रोज लड़ाई झगड़ा होते , बनो नहीं तुम आदी ।।

टूटे घर परिवार सभी से , रिश्ते नाते छोड़े ।
ऐसी आदत वालो से अब , काहे रिश्ता जोड़े ।।

खाने को लाले पड़ जाते , बच्चे भूखे सोते  ।
ज...

जमाने भर का दर्द 

समेटे हुए हूँ अपने भीतर 

बेहिसाब शिकायतें हैं उनसे 

पर कह कुछ नहीं रहा उनसे 

कर रहा हूँ शिकायत 

सिर्फ अपनी ही परछाई से... 

मैं नहीं चाहता कोई बरबाद हो ?

मैं हमेशा से ही आबाद का समर्थक रहा हूँ 

तो भला कैसे, किसी को गिरा सकता हूँ ?

मैं आस्तीन में छुपा कोई सांप नहीं ?

मैं हूँ एक खुली किताब 

मेरे...

हा, मैं लड़की हूँ
निडर और प्रतिभावान हूँ
इस समाज के लिए प्रतिष्ठा हूँ
ईश्वर की वरदान भी हूँ
हा, मैं लड़की हूँ
विद्या मेरा सिंगार है
अस्मिता ही मेरी वस्त्र है
समाज की रूढ़िवादी जंजीरों
से मुक्त हूँ
हा, मैं लड़की हूँ
लता मंगेशकर बनकर मैंने
दुनिया को संगीत दिया
तो बनकर हिमादास मैंने
भारत को स्वर्ण पदक दिया
...

खुदी में, खुदी से, खुश रहना सिखा दिया मुझे 

मेरे हालातों ने जीने का मकसद बता दिया मुझे... 

के अब परवाह नहीं है दुनिया की मुझे

चाहे जो मर्जी कह ले वो, जो कहना है उसे. 

अपने हौसलों के बल पर मैं सब करके दिखा दूंगा 

जो दी है जमाने ने टीस मुझे 

उसी टीस के तिनकों से मैं अपना घर सजा लूंगा. 

खुदी में, खुदी से, खुश...

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