मिस्टर रमन अग्रवाल लगभग तीन वर्ष बाद अपनी कम्प्यूटर लैब से बाहर आया। सारी रात वह सोया भी नहीं था। फिर भी उसका चेहरा एक अभूतपूर्व सफलता से दैदिप्यमान हो रहा था। उनके पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। तीन वर्षों से वे अपनी खोज में इस प्रकार डूबे थे कि घरवाले उसे सनकी समझने लगे और बाहर के लोग पागल। उनकी बढ़ी...

गाँव में मेरे घर के ठीक सामने गुलकंदी देवी का घर, इनके तीन बेटे नाती भरा पूरा परिवार था इनके यहाँ लकड़ी का काम होता था। कालांतर में बिजली का काम भी होने लगा था।

गुलकंदी देवी बहुत ऊंचा सुनती थी इसलिए हम सभी बच्चे उन्हें बहरी दादी ही कहते थे। बहरी दादी की उस समय उम्र रही होगी करीब पिचहत्तर, छिहत्तर, कद...

बैंड बाजे की ढम-ढम का शोर सुबह की गुनगुनी धूप से ही शुरू हो चुका था. सभी तरफ पायल और चूड़ियों की खनक हंसी ठिठोली की आवाजों से सारा माहौल एक खुशनुमा वातावरण का एहसास करा रहा था. विध्या ने अलसाये मन से खिड़की का पर्दा लगाकर सोने की कोशिश की. लेकिन अब नींद कहां आंखों में आ रही थी. मोगरे और सेंट की खुशब...

नवम्बर शुरू हो चुका था। अब दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगी थीं। वह काफी देर से इस सुनसान से बस स्टैंड पर खड़ा था और 15 नं बस का इंतजार कर रहा था। यह 15 नं बस उसे ज्ञानी बार्डर पर छोड़ देगी फिर वहाँ से थ्री व्हीलर मुश्किल से बीस मिनट में घर पहुँचा देगा। घर का खयाल आते ही सब चीजें उसके सामने आने लगीं।...

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