खिड़की से आती गर्म खामोश बयार मानो आत्मा को कचोट रही थी. तन्हाई का आलम ऐसा था. की साए-साए की आवाजों से हर कोई भयभीत हो रहा था. सुबह का सन्नाटा मानो दोपहर के दो बजे का एहसास करवा रहा था.

सेठ ताराचंद का आलीशान बंगला आज पूरे कॉलोनी में मशहूर था. करोड़पति  ताराचंद के यहां अनेक नौकरों की लाइन लगी रहती थी...

August 20, 2020

जब मेरा विवाह हुआ, तब से देखा है ताई जी को. वह मेरे पति की ताई हैं. लंबी, इकहरी और गोरी-चिट्टी. चेहरा झुर्रियों से भरा है किंतु चेहरे की मुस्कान देखते ही बनती है. अगले बरस ताईजी ब्यानबे की हो जाएंगी.  इस उम्र में लोग हाथ पैरों से लाचार हो जाते हैं और वह अपना काम खुद कर लेती हैं. कहती हैं कि वह न कभी...

रोज़ की तरह उस दिन भी ठीक साढ़े छः बजे मेरी आँख तो खुल गई पर बदन अलसाया ही रहा। बिस्तर छोड़ने को मन नहीं कर रहा था। हीटिंग ऑन हो चुकी थी। घर अच्छा ख़ासा गरम था। दिन का उजाला अभी सोया पड़ा था। अचानक मुझे याद आया, सवा आठ पर मुझे फ़ियोना से इंश्योरेन्स के सिलसिले में उसके ऑफ़िस मिलना है। अब चाहे तन आलस करे य...

And the spirit of God moved upon the face of the waters

‘और ख़ुदा की रूह पानी की सतह पर तैरती थी’

                                                -बाइबल से

एक ब्राह्मण था। एक मुसलमान, एक दल...

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