... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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धूल-भरे रास्ते उस पर जेठ की तिलमिलाती गर्मी को सहते, मजदूरों का कारवां बढ़ा जा रहा है, अपने गंतव्य की ओर। मजदूरों का ये कारवां अंत में चलते-चलते रुक जाता है, एक हरे-भरे बरगद के नीचे, जिसकी लाल-गुलाबी नवल किसलय मन को मोह रही थी। उसकी गहरे हरे पत्तों की घनी छाँव और आकर्षित करती लम्बी-लम्बी जटायें मानो...

कल महामारी के दिनों में  सूत्र में आपने अशोक गौतम का लिखा गाँव-शहर के बाहर के हाल पर विवरण पढ़ा था. आज उसी लेख के क्रम में प्रस्तुत है कहानी बापू खुश है

इसी शहर से सटे अनेकों गावों में से एक गांव में पचहत्तर साल का सरनिया मिस्त्री अपने मानसिक रूप से कमजोर चालीस साल लड़के मनोज के साथ अपने बाप दादा के स...

"नानी नानी, मेरी प्यारी नानी, आज सुनाता हूँ मैं तुम्हे कहानी|"

"अरे वाह रे मेरे बच्चे, आज तू मुझे ही कहानी सुनाएगा| अपनी नानी को कहानी सुनाएगा| फिर तो तू इतिहास बनाएगा| यहाँ तो हमेशा से कहानियाँ सुनाने का परमानेंट ठेका नानी-दादी को ही मिला हुआ है| चल फिर शुरू कर|"

"जी मेरी अच्छी नानी, पर आज मैं तुम्ह...

रोज दिन को जब बड़े डाकखाने से पंचायत के ब्रांच पोस्ट ऑफिस में डाकिया डाक का थैला लाता था तो वह  बाजार के आसपास के अखबार शौकीनों को पांच सात अखबार भी ले आता था। उसमें चार पांच हिंदी पढ़ने वालों के होते तो एक दो अंग्रेजी के स्कूल के मास्टरों के। आसपास के गांवों में पांच-पांच सात-सात पास फेल पढ़े तो थे, प...

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