And the spirit of God moved upon the face of the waters

‘और ख़ुदा की रूह पानी की सतह पर तैरती थी’

                                                -बाइबल से

एक ब्राह्मण था। एक मुसलमान, एक दल...

उसके गए आधा घंटा हो चुका था। मेरे अंदर का शोर, सैलाब बनकर उमड़ रहा था। दिल दुखों का समंदर बन चुका था। ऊबड़-खाबड़ ख्यालों से सिर भारी हो गया। मुहब्बत की जिल्द-दर-जिल्द रिसने लगी थी। उसकी ठोस मर्दानी आवाज पूरे घर में गूंज रही थी – “सुनैना ! बेबसी से मुहब्बत का दामन आबाद नहीं हुआ करता। मजबूरी मुहब्बत क...

कमला बड़ी देर तक कमरे में निढाल पड़ी रही फिर उसे न जाने क्या सूझी कि वो उठकर बाहर चली आयी। उसने दुर्गेश से कहा ‘‘मुझे छत पर ले चलो दुर्गेश’’।

दुर्गेश ने हैरानी से कहा ‘‘अभी टाइम है धूप ढलने में’’।

कमला ने दांत पीसते हुए सख्ती से कहा ‘‘ले चलता है कि चाहता है कि मैं गिर पड़ जाऊँ’’।

दुर्गेश ने भी सख्ती से कह...

Please reload

eKalpana literary magazine

​​Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

सभी रचनाएं
ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें
Please reload

लेखकों के लिये सूचना

 

अक्टूबर में “पाँच कहानियाँ” का तेईसवाँ अंक प्रकाशित होने वाला है. उसके लिये अपनी सबसे बेहतरीन अप्रकाशित कहानी भेजिये. 

यदि आपकी कहानी “पाँच कहानियाँ” के लिये पसंद आई, तो रचना के लिये लेखक को ₹ 2000 का

मानदेय मिलेगा.

कहानी भेजने की आखिरी तिथि 14 अक्टूबर 2020 है.

कहानी यूनीकोड में हो, pdf format में न हो, ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें

Please reload

... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ई-मेल में सूचनाएं, पत्रिका व कहानी पाने के लिये सब्स्क्राइब करें (यह निःशुल्क है)