हालांकि महामारी के डर से सहमने तो लोग तब से ही लग गए थे, जब से वे बाहर के देशों में इस महामारी से हो रही मौतों में लगातार होते इजाफे के बारे में पढ़, सुन, देख रहे थे। पर फिर भी अधिकतर इस बात से संतुष्ट थे कि अपने यहां ऐसा वैसा कुछ नहीं। धीरे-धीरे इस बात की अफवाह शहर के लोगों के बीच अफवाह फैल गई जो बा...

बालक हमारे भविष्य का प्रतिनिधि है. आने वाले समाज का विवेक. इसलिए जरूरी है कि उसकी नैसर्गिक जिज्ञासा बनी रहे. उसके लिए किया क्या जाए? इसका उत्तर प्रायः हमारे पास नहीं होता. परंपरा और संस्कृति के दबाव में हम जो करते हैं, वह अकसर विपरीत परिणाम देने वाला होता है. शायद इसलिए कि हम बालक को जरूरत से ज्यादा...

  

 मानवाधिकार वे नैसर्गिक, मूलभूत, सार्वजनिक, मौलिक अधिकार हैं, जो कहते हैं कि किसी भी मनुष्य को देश, नस्ल, जाति, धर्म, भाषा, लिंग, रंग के आधार पर समानता,  स्वतन्त्रता, सुरक्षा और सम्मान के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। समूचे विश्व में यह विषय उतना ही पुरातन है, जितना मनुष्य जीवन। धार्मिक...

'पैडमेन फ़िल्म के बहाने' ...

नीलम कुलश्रेष्ठ

मुझे लगता है फ़िल्म पैडमेन ने एक सामाजिक क्रांति कर दी है. लोग आज खुलकर स्त्रियों द्वारा मासिक धर्म या माहवारी या ऋतुचक्र या मेंस्ट्रुअल सायकल या संक्षिप्त में जैसा कि शहरों में कहा जाता है `एम.सी.’ या ‘महीने से`के समय उपयोग में लाये जाने वाले सेनेटरी नेपकिन्...

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