... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

भरोसे का आदमी ढूढते मुझे साढ़े सन्तावन साल गुजर गए|कोई मिलता नहीं | मार्निग वाक् वालो से मैंने चर्चा की वे कहने लगे यादव जी....  'लगे रहो'.... | उनके 'लगे-रहो' में मुझे मुन्ना-भाई का स्वाद आने लगा | मैंने सोचा गनपत हमेशा कटाक्ष में बोलता है | उसकी बातों के तह में किसी पहेली की तरह घुसना पड़ता है |
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आसमान से गिरते हुए मैंने बहुतों को देखा है ,मगर किसी मुहावरे माफिक खजूर में लटका किसी को नहीं पाया ....| एक तो अपने इलाके में दूर-दूर तक खजूर के पेड़ नहीं ,दूजा आसमान को छूने वाले  आर्मस्ट्रांग  नहीं |
किसी काम को वाजिब अंजाम देने के लिए आर्म का स्ट्रांग  होना बहुत जरूरी साधन है ऐसा हमारे गुरूज...

September 14, 2019

अपने शहर में हिंदी पखवाड़ा पूरे उफान पर तो हिंदी में भी न लिखने वाला पूरे तूफान पर। 

अंग्रेजी की चपेट से जो हिंदी के लेखक जैसे तैसे बचे हुए थे, वे अब मनमाफिक हिंदी पाखवाड़े की चपेट में थे। जिस ओर मन हो रहा था वे उस ओर बह रहे थे। कविता के नाम पर जो उनका मन कर रहा था, पूरे होशोहवास में कह रहे थे।

 साल भर...

September 8, 2019

यह किस्सा उसके बाद का है जब अवैध धंधों और संबंधों के अनगिनत तमगों के विजेता इंस्पेक्टर मातादीन चांद प्रशासन के आग्रह पर उनके पुलिस विभाग में क्रांतिकारी सुधार लाने के इरादे से पुलिस सेवा आदान प्रदान कार्यक्रम के तहत अपनी सरकार द्वारा डेपुटेशन पर चांद भेजे गए थे और चंद दिनों में ही उन्होंने वहां के प...

वैज्ञानिक परेशान थे। यान दुल्हन की तरह सज धज कर चांद पर जाने को तैयार था, पर उन्हें यान में चांद पर किसे भेजा जाए, ऐसा महापुरुष ढूंढे नहीं मिल रहा था। उन्होंने उन देशों की सरकारों से भी संपर्क किया जिन्होंने अपने बंदे अपने यान में चांद पर भेजे थे। पर उन देशों की सरकारों ने हमारी तकनीकी पर अविश्वास क...

वे गुजरे तो युगों से बनी एक और परंपरा को तोड़ते गुजरे। अच्छा तो खैर उन्होंने किसीका सपने में भी नहीं किया था, पर अपना सब बुरा किया भी यहीं छोड़ गए पर साथ में मरते हुए बीवी का गिफ्ट दिया मोबाइल जरूर साथ ले गए ताकि बीवी का डर मरने के बाद भी उनमें बना रहे, कम से कम सात जन्म तक । इस उम्मीद के साथ कि तीन त...

आज तक समझ नहीं आया, ये मौलिक रचना क्या होती है!

     भाषा-संस्कृति विभाग में था तो सम्मेलन होने पर लेखक-कवियों को पत्र भेजे जातेः ‘‘कृपया अपनी अप्रकाशित, अप्रसारित और मौलिक रचना का पाठ करें.......आप समारोह में कवि के रूप में आमन्त्रित हैं।’’

    लगता, साहित्यकार बंधु अभी किसी और रूप में...

मार्निग-वाक में डागी ‘सीसेंन’  को घुमाने का काम फिलहाल मेरे जिम्मे आ गया है |

रास्ते में दीगर कुत्तों से बचा के निकाल ले जाने का टिप, गणपत ने जरूर दिया था, मगर प्रेक्टिकल में तजुर्बा अलग होता है|

एक हाथ में डंडा,एक हाथ में पटटा पकडे, कुत्ते के बताए रास्ते में खुद खिचते चले जाओ| सामने आये दूसरी  नस्ल क...

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