... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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"मैं वापस वृन्दावन लौट कर आऊंगा."

"नही आओगे, आना होता तो कहना नही पड़ता."

"मेरे जाने के बाद तुम्हारा विवाह हो जायेगा, किसी ग्वाले से."

"और तुम्हे असंख्य राजकुमारियाँ मिल जाएंगी."

"तो चलो ना मेरे साथ, मेरे निर्णय पर कोई आपत्ति नही करेगा."

"तुम्हारे प्रेम में मैं सब कुछ त्याग चुकी हूँ, मुझे मुरली  के साथ का...

पाठकगण और लेखकगण, मित्रों!


नमस्कार

ई-कल्पना का फ़रवरी अंक, जिसका थीम है, अधूरी तस्वीरें, आज प्रकाशित हो रहा है. ये हमारा पहला अंक है. आशा है आपको पसंद आएगा.

ई-कल्पना आधुनिक हिन्दी आवाज़ का माईक्रोफ़ोन है, ये बात हम पिछले महीनों से लगातार कहे जा रहे हैं, क्योंकि लेखकों को अवसर देना हमारा उद्देश्य है.

आग...

जब तक तस्वीरें अधूरी रहती हैं, उनमें मास्टरपीस बनने का दम रहता है. ई-कल्पना की शुरुआत हम ऐसी ही अधूरी तस्वीरों से कर रहे हैं.

नौजवान जीवन, जिसने अनुभवों का पूरा विस्तार नहीं देख पाया है, एक अधूरी तस्वीर ही है. समाज, परिवार या खुद की आकांक्षाओं पर खरे न उतरने पर कुंठाग्रस्त नवयुवक अकसर आवेगशील कदम उठा...

आई थी हमारे घर में कायस्थों के यहाँ से एक लड़की. शादी क्या थी, फँसा लिया था उसने पोते को, वो लओ वाली मैरिज करा के. बड़ी चिड़ मचती थी. जब कभी मैडम सामने आती थीं, खून खौल उठता था. ना काम की थीं, ना धाम की. कोई काम करने को कहो, तो ऐसे हौंले-हौंले हाथ-पैर उठातीं, कि पोता खुद भाग के हाथ बटाने में लग जाता....

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