... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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भाई को एअरपोर्ट छोड़ के वह लौटी है. अंदर बर्फ़ की सफ़ेद सख़्त चट्टान अभी भी ज्यों की त्यों है. उसको रुलाने की सारी कोशिशें व्यर्थ साबित हुईं. रोना इतना आसान है क्या? वो भी तब जब अभी आपने चलना शुरू ही किया हो और अचानक पायें आपके पैरों के नीचे से ज़मीन सरक रही है. आप एक साथ न जाने क्या-क्या बचा लेना चा...

बिस्तर पर लेटे-लेटे बुरी तरह कुड़मुड़ा रहा हूँ. घंटों से चेष्टा कर रहा हूँ कि नींद आ जाए पर कम्बख़्त आती नहीं. मौत का एक दिन मुअय्यन है, नींद क्यों रात भर नहीं आती! यह कैसा अजाना रोग लग गया? घड़ी की टिक-टिक बराबर कानों में पड़ रही है. समय क्या होगा? बारह! रेडियम डायल की सुइयाँ चमक रही हैं.

उठ कर स्वि...

मोबाइल पर दोनों ओर से बात हो रही थी. दोनों ओर अपरिचित थे, लेकिन आकर्षण के साथ-साथ एक-दूजे को जानने-समझने की दबी इच्छा थी. तभी तो बात आगे बढ़ती गई.

हैलो.

हाँ हैलो? कौन?

आप कौन?

हद है! काॅल आपने की है. पहले आप बताइए कि आप कौन बोल रहे हैं?

मैं मानव बोल रहा हूँ.

मोबाइल पर मानव ही बोलेगा. कोई गधा नहीं. नाम बता...

रजत ने मेल खोली और एक एक कर के पढ़ना शुरु किया.

- मीता ने आई इल्यूजन का मजेदार चित्र भेजा था, यूं तो गांधी जी का चित्र था पर ध्यान से कुछ देर देखो तो हिटलर नजर आता था. उसने लापरवाही से मीता को जवाब में थैंक्स  फेंका और मेल को डिलीट कर दिया. ओ माई गाड, इतने मेल आते हैं कि अगर उन्हे रखने लगे तो उसके मे...

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