... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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'ये रही हमारे घर की तस्वीर ...' उसने उसके सामने टेबल पर एक सुन्दर सा पिक्चर पोस्टकार्ड एक ख़ास अंदाज़ में रखते हुये कहा.....

'कैसा है ?छोटा है, बट नाट बैड...रहेंगे तो हम दो ही. देखो ज़रा ....ऐसा ही चाहा था न तुमने .'

वह स्वयं ही फ़ोटो को विभिन्न एंगल से देख रहा था. उसने नहीं देखा, वह किस तरह हैरत से कभी उ...

दूर दूर से कई निमंत्रण मिलते हैं गुलजिंदों को . गुलजिंदों पंजाब के एक समृद्व गांव में एक सामाजिक कार्यकर्त्ता के रुप में अपनी पहचान बना चुकी है . जीवन के पचाास बंसत देख चुकी गुलजिंदों निमंत्रण पत्रों को देख कर सोच रही है  सब जगह पहुंचना क्या आसान है . डाक देखते हुये इस बार के पत्रों में एक निमंत्रण...

जब तक मैं आपके पास रही कभी भी अपने मन की बात आपसे नहीं कही. ऐसा नहीं था कि कहना चाहा नहीं, परंतु कह नही सकी. कहने का साहस ही नहीं हुआ. हर दूसरे-चौथे रोज़ मैं आपके घर जाती, आपसे बात करने का इरादा भी मैंने कई बार किया था, पर हर बार......

सुबह साढ़े दस बजे न्यू डैली ढाबा खुला तो था, मगर इस समय यहाँ कोई था नहीं. था भी ढाबा पैरिस के लिटल इंडिया से दूर, गुमनाम से इलाके में. तो इतने बजे यहाँ कोई क्यों आता?

ढाबा पैरिस में ज़रूर था, मगर कहीं से इसे अप-स्केल नहीं कहा जा सकता था. ढाबा कह कर बुलाते थे, ढाबा जैसा ही था.

वसीम? कैश-रजिस्टर के सामन...

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