... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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पिछले दिनों की बात है. पूर्णिमा की शाम थी. समुद्र दूर खिसका हुआ, उतरा हुआ था. पानी तरंगहीन था. उधर क्षितिज पर डूबता सूरज अलग गज़ब ढा रहा था. एक पति-पत्नी का जोड़ा किनारे पर खड़े चुपचाप पानी के विस्तार पर सूरज की किरणों का खेल देख रहा था. आसपास और भी लोग थे, पर ये दो रेतीली ज़मीन पर दो शिलाओं समान खड...

पिछले कुछ दिनों से यह उसकी नियमित दिनचर्या थी. शाम को कार्यालय से निकलने के बाद वह सामने वाले पार्क में जाकर कोने की एक बेंच पर बैठ जाता था और वहाँ टहलने वाले भांति-भांति के तथा हर उम्र के नर-नारियों की गतिविधियों को बड़े ध्यान से देखा करता था. इस क्रिया से उसके मन को बड़ा सुकून प्राप्त होता था और सुब...

जयशंकर प्रसाद की कहानी खंडहर की लिपि पढ़ कर कुछ पुरानी यादें ताज़ा हो गईं.

दिल्ली को एक आधुनिक महानगरी बने बड़ा कम समय हुआ है. उस से पहले तो ये कम आबाद दिखती थी, यहाँ खंडहर पसर कर इतिहास फुसफुसाते थे. तब ये मेहमान की तरह गठे से नहीं खड़े दिखते थे. बाँहें फैलाए आलिंगन का न्यौता देते थे. स्कूल-बस की खि...

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