... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

रातों के साथ जाने कितने राज़ जुड़े होते हैं. इसी लिये रातों के किस्से हमेशा दिलचस्प हुआ करते हैं. लेकिन रातों के अक्सर किस्से रातों की तरह स्याह हुआ करते है. रात की तारीक़ी मे अक्सर , एक दूसरी ही जमात रिज़्क़ की तलाश मे निकलती है. यह जमात भी दिन मे कारोबार करने वाली जमातों से मिलती जुलती , लेकिन कई बार ब...

जब अपना घर-द्वार बेचकर गाँवों से आए लोगों ने कॉलोनी में बड़ी-बड़ी, ऊँची-ऊँची कोठियाँ खड़ी कर लीं और अंतरंग को कीमती साज-सामानों से सजा-धजा दिया तो उन्हें इनके हिफ़ाज़त की चिंता सताने लगी. इस बारे में उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों से मशविरे लिए. कुछ सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क भी किया. महंगे सुरक्षा गार...

चिड़िया की चहक वाली कॉल बेल की आवाज़ मेरे मन में एक रस-सा घोल जाती थी - 'कोई आया' के शब्दों से मेरा अंतर भी चहक उठता था. ऐसा नहीं था की मुझे किसी विशेष का इंतज़ार होता हो. यह बेल तो बस घर की नीरवता को भंग करती थी. इसीलिए मुझे उसके चहकने का इंतज़ार रहता. घर में था ही कौन - मैं, पापा व हमारा पुराना नौकर र...

अक्सर कहानियों का पहला बीज अखबारों के कॉलमों में पाया जाता है, मगर कहानियों के स्रोत हमारे मन-मस्तिष्क में छिपे हों, क्या ऐसा होना भी सम्भव है? क्या ये आवश्यक है कि कहानी समाज की विडंबनाओं और कुंठाओं के दायरों में ही सीमित रहे? इस तरह के सवाल मैं विभिन्न कहानीकारों से कई दफ़ा पूछ चुकी हूँ.

जवाब में अ...

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