... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

जनवरी अंक में हमने ऐलान किया था कि ई-कल्पना वॉल्यूम 2 के लिये हमें बेहतरीन कहानियों की तलाश है, कि हम वही कहानियाँ प्रकाशित करेंगे जिनकी भाषा हमें आकर्षित कर जाएँ और जिनका कथानक दिलचस्प और अर्थपूर्ण हो. और देखिये पहले हफ़्ते में ही आपने हमें इतनी सारी ऐसी कहानियाँ भेज दी हैं जिनकी आवाज़ में जादु है,...


नई दिल्ली ,विश्व पुस्तक मेले में 11 जनवरी शाम 4 बजे किताब वाले प्रकाशन पर प्रतिष्ठित लेखिका संतोष श्रीवास्तव के उपन्यास 'लौट आओ दीपशिखा "का विमोचन वरिष्ठ लेखिका चित्र मुद्गल के द्वारा संपन्न हुआ ।चित्रा मुद्गल ने संतोष जी के जीवन को एक उपन्यास बताते हुए कहा कि...." वे अपने रोमांचक और हौसलो से भरे ज...

वहम-ओ-गुमान से दूर दूर, यकीन की हद के पास पास, दिल को भरम ये हो गया है, उनको हमसे प्यार है ...

हमारा सिलसिला भी एक भ्रम था. था मगर वो पागलपन.

तब मुलाकातों के लिये हम भागते फिरते थे, दो क्लासों के बीच अंतराल में, हाँफते-हाँफते, बदहवास ... कभी सैन्ट्रल-लाईब्रैरी की सूनी-सी हिन्दी सैक्शन की आयल में टकटकी...

बड़ी लम्बी रात थी वह. कटती ही न थी. अलाव की आग भी बुझती जा रही थी. आंखों में नींद भी नहीं आ रही थी और अंधेरा अपने भयावह रूप को और अधिक भयावह और विकराल करता जा रहा था.

वह दो लोग थे, जगन और राम मूरत. जगन जवान था और राम मूरत बूढ़ा, परन्तु उनके सुख-दुख इतने साझे थे कि उम्र का उनके बीच कोई भेद न था. उन के घ...

चार महीने हो चुके थे. फोकट गुरू घर से गायब थे. पहले तो घर वालों ने यही समझा कि दो चार दिन में घूम-घामकर घर वापस लौट आयेंगे. लेकिन जब देखते-देखते चार महीने बीत गये तो घर वालों के माथे पर भी चिंता की रेखाएं दिखने लगी. वैसे भी घर में प्राणी ही कितने थे ..? छोटा बेटा तो गुजरात के एक टेक्सटाइल मिल में नौ...

January 2, 2017

प्रिय पाठकों! यह पीढ़ियों से उलझे व शोषित समाज की कथा है. यह एक ऐसी काली मिट्टी की कहानी है जिसकी कोख में अमृत भी है और विष भी. यह एक ऐसी कहानी भी है, जहाँ अतीत वर्तमान का रास्ता रोके खड़ा है. कहानी के अटपटेपन के लिए खुद कहानी और उसका समाज दोषी है. लेखक को दोषी न माना जाए.

बाबा साहेब की प्रतिमा के सा...

उनका वास्तविक नाम कुछ और था, लेकिन साहित्य जगत में वे गम्भीर के नाम से विख्यात थे. कहानी लेखन, उपन्यास और फ़िल्मों की स्क्रिप्ट लिखना, इन तीनो कामों में वे अपना लोहा मनवा ही चुके थे. बहुत कम उम्र में ही उन्होंने बहुत सी दौलत और शोहरत हासिल कर ली थी. साहित्य के बाज़ार में उनके नाम की अपनी ब्रांडवैल्यू...

नए साल की शुरुआत है और ये अंक ई-कल्पना वॉल्यूम 1 का आखिरी अंक है.

मौका है, दस्तूर भी है ... तो इस अंक में हम आपको कई कहानियों का गुलदस्ता प्रस्तुत कर रहे हैं. आशा है आपको सब कहानियाँ पसंद आएँगीं.

​आगे सुनिये, आगामी अंकों में हर स्वीकृत कहानी को हम 5000 रुपए मानदेय देंगे.

ई-कल्पना वॉल्यूम 2 के लिये हमें...

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लेखकों के लिये
ई-कल्पना जनवरी 2020 कहानी प्रतियोगिता के परिणाम घोषित हो चुके हैं.
पुरस्कार राशि -
प्रथम चुनी ₹ 3000
द्वितीय चुनी ₹ 2000
तीसरी चुनी कहानी ₹ 1000

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