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April 4, 2017

भास्करराय ने तबले पर थाप दी और चारों तरफ तबला गुंज उठा ... धातिर किटितक ... तिरकिट धूम्म् ... ऊम्म्म्म्.

उनको खयाल आता है कि सामने बैठे तबलावादन सीखने आये हुए सारे स्टुडन्ट्स बेरुखी से बैठे हुए है. किसी के चेहरे पे सीखने का लगाव नहीं. कुछ स्टुडन्ट्स का तो ध्यान भी बाल्कनी के उस पार फैले फ्लायओवर से स...

शहर की हवा से बहुत पतली होती है गांव की हवा. और शायद हलकी भी. इसलिए कोई फुसकारी भी भरे तो वह गांव के इस कोने से उस कोने तक पार चली जाती है. औरतों और मर्दों को चर्चा के लिए गोलबंद करती हुई. बदलाव का रंग गांवों पर भी चढा है. जब से पक्के घर बनने शुरू हुए हैं, तब से गांव वालों ने भी बातों को कैद करके रख...

    

मैं खड़ी थी सत्याग्रह भवन के सामने और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में यह मेरी यात्रा का सम्मेलन स्थल से पृथक पहला दर्शनीय स्थल बना। यहाँ चलने का हमने नहीं कहा था पर यहाँ सबसे पहले पहुँचाने का श्रेय थहमारे टूरिस्ट गाइड कम टैक्सी ड्राइवर मिस्टर माइक को। उसके और मेरे बीच संवाद की स...

इसे मैं क्या नाम दूँ-कथा, आत्मकथा, स्मरण, संस्मरण या शब्दों का बुना हुआ एक नाज़ुक रिश्तो का जाल कहूँ,  जो वक्त अनुसार अपनी सुविधा से बुन लिया जाता है  या उधेड़ लिया जाता है. जब गुलशन कौर से उसकी यादों की चादर में टांके हुए इन सितारों की बात सुनी तो सोचा दुख-सुख, जुदाई-मिलम के इस संगम को ज़बान दूँ। सुनत...

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