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ज़िन्दगी

लंबी साँस है

हवा को सीने में देर तक 

क़ैद करना 

साँसों के दरम्यान 

यादों की 

सुन्दर सी बुनाई 

कभी ठहाका 

कभी मुस्कराहट 

या कभी साँस छोड़ते हुए 

लंबी सी आह !

ज़िन्दगी 

आँखों में तालाब 

बसा लेना है 

ज़िन्दगी 

लमहात को स्पर्श कर पाना है 

ज़िन्दगी 

बेबयाँ  हैं 

कई बार शब्दों से परे है।

चंद्रभान,  जवाहरलाल नेहरू व...

नदी के किनारे

सबेरे सबेरे

ताज़ी  हवा को सीने में भरते हुए

टहलना चाहता हूँ

जीना  चाहता हूँ....

फिर से

बगीचे में

सूखे पत्तों पर

नंगे पाँव

फुदकना चाहता हूँ

घर लौटकर

माँ के  आँचल में दुबकना चाहता हूँ...

फैलना चाहता हूँ

आसमान के ओऱ तक

खेतों के अंत तक

पीपल के पोर पोर में

नदी में घुल जाना चाहता हूँ

हवा बन जाना चाहता हूँ

कई ब...

खाली नींद 

तैर रही 

कासा-ए-निग़ाह में....

इक नींद का वादा  दे दो 

कि अगला ख़्वाब 

मुझ अकेले का न हो 

मैं 

तुम 

सब 

शामिल हों (चंद्रभान)

(कासा=कटोरा )

चंद्रभान,  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के इतिहास अध्ययन केंद्र में प्राचीन इतिहास के शोधार्थी हैं।...

स्वप्न बेचने वाला एक दिन आया एक छोटी नगरी में

सुन्दर - सुन्दर स्वप्न भरे हैं बोला मेरी गठरी में

गली - गली आवाज़ गयी और लोगों ने उसे घेर लिया

लोगों में कौतूहल था – क्या बात सत्य है कुँजड़े की ?

भीड़ इकट्ठी देख देखकर कुंजड़ा मन में हरषाया था

स्वप्न बेचने का अवसर उसने इस नगरी में पाया था

उत्सुकतावश एक व्यक्ति ने...

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