... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

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रविवार का दिन ।

नवाबों का शहर ।

गीत ग़ज़लों के बीच शाम ।

है बहुत कुछ इस शहर की आबोहवा में ।

आजकल गंज में ट्रैफिक ज्यादा रहता है ।

मेट्रो का काम चल रहा है ।

फिर भी गंज तो गंज है ।

वही गुलजार और रोशन गली ।

और गलियों के किनारे ढेरों शोरूम्स ।

और ढेरों लोग ।

सब अपने में मशगूल ।

शोर भी है पर शान्ति भी ।

भीड़ भी है और त...

इंसान हो तो पहले इंसान देखो

बाद उसके मजहब औ ईमान देखो !

देश सेवा के अनेकों मार्ग हैं

अपनी काबिलियत का एक मुकाम देखो !

गर्व हो सबको तुम्हारे काम पर

अपनी खातिर ऐसा ही कुछ काम देखो !

न बड़ा - छोटा न कोई काम है

मंजिलें गुमराह होने के साथ देखो !

दो गज ज़मीन काफ़ी है इंसान को

इससे ज्यादा दूसरों के साथ देखो !

शान-ओ-शौक...


 

ये सिर्फ यादें ही तो है ,

क्या हुवा अगर सताती है,

मगर पास तो वही रह जाती है,

ये सिर्फ यादें ही तो है ,

भूल जाने की फितरतो के बीच

खीच किस्सी किनारे की ओर,

बंद निगाहों से

ये बरसातो क दौर ,

ये सिर्फ यादें ही तो है ,

उनके अक्स को ,जेहन में जिन्दा रखे हुये

बोझिल मन की रौनक लिये

अब ये सिर्फ यादें ही तो है |

मोहित क...

फ़साने से तुझे अचरज, जो होता है तो होने दे

हक़ीक़त लब पे आ जाये , मुझे इतना ही काफी है ।

मोहब्बत सच्ची - क्या - झूठी, मोहब्बत तो मोहब्बत है

मोहब्बत तुझको हो जाये , मुझे इतना ही काफी है ।

वो बारिश कल हुयी थी जो , हमारे प्यार पे प्यारे

असर उसका नज़र आये , मुझे इतना ही काफी है ।

मिले कब ? कब हुए तुमसे जुदा हमदम...

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