... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ऐ जिन्दगी !

जितना मुझको तू समझे है, उससे भी आसान हूँ मैं,

थोड़ा-सा परेशान दिखे हूँ, थोड़ा-सा परेशान हूँ मैं !!

न तुमसा चंचल-कोमल हूँ, न ही तुझसा महान हूँ मैं..

पर जितना मासूम दिखे तू , उतना ही नादान हूँ मैं !!

तेरे रस्ते, तेरी गलियाँ, कुछ दिन का मेहमान हूँ मैं,

राही हूँ; बस ये जानू मैं, मंजिल से अंजान हूँ म...

निरंजन आज सुबह जल्दी अपनी वर्कशॉप में आकर काम में व्यस्त हो गया। शाम पांच बजे तक हर हालत में कार ठीक करके देनी है। बिना पलक झपके काम में अपने कर्मचारियों के संग कार को दो बजे ही दुरुस्त कर दिया।

अब निरंजन ने चैन की सांस ली और खाना खाने के पश्चात वर्कशॉप से बाहर आया। एक नजर वर्कशॉप के ऊपर डाली। बहुत ब...

आप को भी याद होगीं
सितारों की नाज़ुक सी टिमटिमाती कतारें
प्यारी २ सी नदिआ के किनारे
और वो तेरे मिलन पल
वो दिलकश से लमहे

ज़ी-नफ़स गलिआं
शादाब-नुमा गायों

जज़ीरा-नुमा हमारा वो गुणगानता संसार
नज़्मों का ज़खीरा
लहकती फसलों की महकें
गुम हो गईं हैं यहीं कहीं
दुश्मनी सदायें हैं हर जग़ह -

सभ रूठ गई हैं
मौज-ए-शबाब...

October 25, 2017

जीवन का जो मज़ा  निन्दास्तुति में है, वैसा भगवत भक्ति में कहाँ ?  निन्दास्तुति वह नौका है जो   अठखेलियाँ करती हुई, रसवर्षा से सराबोर करती हुई ,मनोरंजक हिचकोले खाती हुई ,किसी भी उद्यमी व्यक्ति की ज़िंदगी की नदी को खुशी खुशी पार करा देती है |निन्दास्तुति से प्रतिदिन प्रतिपल अमृत निकलता रहता है |अविराम र...

निरंजन आज सुबह जल्दी अपनी वर्कशॉप में आकर काम में व्यस्त हो गया। शाम पांच बजे तक हर हालत में कार ठीक करके देनी है। बिना पलक झपके काम में अपने कर्मचारियों के संग कार को दो बजे ही दुरुस्त कर दिया।

अब निरंजन ने चैन की सांस ली और खाना खाने के पश्चात वर्कशॉप से बाहर आया। एक नजर वर्कशॉप के ऊपर डाली। बहुत ब...

हे दीप ! तू कितना सौभाग्यशाली है 

घोर अंधेरे से तू बड़ा ही बलशाली है !

शत - शत नमन  तेरे त्याग साहस को

तेरे कारण काली रात भी उजाली है !

विशाल शुक्ल

                              साहित्यकार

                              रेलवे स्टेशन...

हर किसी के आगे, 

अपना रोना ले-के, 

क्या करेंगे  

#

ये मायूस फुलझड़ियां ,

बुझे-बुझे अनार ,

फाटकों की 

बे-आवाज 

सिसकियाँ 

फुसफुसाते से 

बिना धमाके वाले 

एटम बम 

इस दीवाली .... 

तोतली आवाज वाला  

खिलौना ले के क्या करेंगे 

--

उन दिनों की जो 

होती थी दीवाली 

व्यंजनों से भरी-भरी  

घर-घर सजती थाली 

वो इसरार से ग...

सुबह के 9 बजे थे मेरी बीबी ने मुझे झंझोर कर उठाया में अचानक उठने से घबरा गया, जैसे कोई करन्‍ट लगा हो। वह बोली पाँच बार नौकर ऊपर आकर तुम्‍हें जगाने की नाकाम कोशिश करके गया है, इसलिए उसे खुद ऊपर आना पढा़, आखिर आज दिवाली है। और बहुत सा समान बाजार से खरीदना है वह जल्‍दी ही तैयार हो गई थी और मेरी चाय मेर...

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