... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

तबस्सुम फातिमा का संकलन "जुर्म" 18 फरवरी 2018 से ऐमेज़ोन (amazon.in) से प्राप्त किया जा सकता है. संकलन ऑर्डर करने के लिये - https://goo.gl/adBE8u

भाँय-भाँय करते स्‍टेशन पर उतर कर यू.डी. का मन नाना प्रकार की दुश्चिन्‍ताओं से घिर गया। कहाँ शहर में प्‍लेटफार्म पर पाँव रखने की जगह नहीं मिलती है और यहाँ चिरई का एक पूत तक नहीं नजर आ रहा हे। तेज धूप चुभ रही थी। गाँव यहाँ से तीस-चालीस किलोमीटर दूर तो होगा ही। न कोई सवारी न साधन। कैसे पहॅुँचेगा। एक ऑट...

“मेरे यहां स्त्री पर हावी पुरुष मानसिकता को ले कर एक आक्रोश है. यह आक्रोश विश्व-पटल पर फैलती स्त्री चेतना और मज़बूती का प्रतीक है.” तबस्सुम फ़ातिमा कहती हैं.

लेकिन वे यह भी तो कहती हैं कि “हम उसे हर बार सपने देखने से पहले ही मार देते हैं...” हाँ, तबस्सुम जी में गुस्सा है, लेकिन उससे भी ज़्यादा मात्रा...

आज़ादी के बाद 3 पीढ़ियाँ बड़ी हो गईं और हम अपने वे सपने साकार भी नहीं कर पाए जो हमने खुद के लिये, अपने बच्चों के लिये और उनके बच्चों के लिये देख रखे थे. हमें पूरा यकीन था कि हम ऐसा समाज ज़रूर बना पाएंगे जहाँ एक लड़की अपनी मर्ज़ी से जी सके.

इस महिला दिवस में हम और सवाल नहीं पूछेंगे. 4 प्रबल लेखिकाओं क...

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