... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

बाहर से लौट कर गेट  खोला, तो भीतर तीन चार पत्र पड़े थे. दो लिफाफे और एक पोस्ट कार्ड. थकान के बावज़ूद पोस्टकार्ड ने मेरा ध्यान खींचा. मैंने देखा उसके कोने पर हल्दी का निशान था. हल्दी का ये निशान.  'यानि ये विवाह का निमंत्रण है. जरूर ये हमारे गाँव से ही आया होगा. वरना आजकल तो इस तरह के निमंत्रण का रिवाज़...

"वैसे तो सभी कागज़ के टुकड़े ही होते हैं ... एपायंटमेंट, प्रोमोशन, डिमोशन, ट्रांस्फर, ज्ञापन और कारण बताओ नोटिस आदि. कागज़ों में जीता है, कागज़ों में ही मरता है सरकारी आदमी. कागज़ों में कागज़ों के लिए ही जीता है, कागज़ों के लिए ही मरता है..."

हाथ में भरी मेथी की अधकटी गड्डी और चाकू थाली में एकदम से छोड़ सुमन जी भागीं दफ्तर जाते पतिदेव देवेंद्र जी के पीछे. नाश्ते के बाद किचन से ही निकल कर गेट की ओर जाते देवेंद्र जी ने अपने पीछे कुछ हलचल महसूस की तो प्रश्नवाचक नजरों से मुड़ कर देखा?

सुमन जी तुरंत नीचे झुक कर कुछ उठाने का उपक्रम करने लगीं. ज...

कुछ दिनों से शीतला के हृदय में रह रह कर जनक ,जननी और जन्मभूमि के लिए प्रेम टपकने लगा था. एक लौटी संतान होने का आभास जब से हुआ ,मन की असीम छटपटाहट से परेशान होकर, उन जाने पहचाने रास्तों, पेड़ों, तालाबों की और घर की करुण पुकार पर, आज पंद्रह वर्ष बाद वह अपने मायका जा रही थी. मुंबई से तीन दिन के ट्रेन या...

Please reload

eKalpana literary magazine

​​Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

Please reload

Please reload

लेखकों के लिये
ई-कल्पना जनवरी 2020 कहानी प्रतियोगिता के परिणाम घोषित हो चुके हैं.
पुरस्कार राशि -
प्रथम चुनी ₹ 3000
द्वितीय चुनी ₹ 2000
तीसरी चुनी कहानी ₹ 1000

 -
​​​सभी रचनाएं
ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें
प्रतियोगिता के अलावा हम ई-कल्पना ऑनलाईन पर चुनी हुई कविताएं, कहानियाँ और लेख भी प्रकाशित करते हैं. ये रचनाएं  भी काफी पढ़ी व सराही जाती हैं. आप अपनी कहानी या रचना ई-कल्पना ऑनलाईन के लिये भी भेज सकते हैं.