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बालक हमारे भविष्य का प्रतिनिधि है. आने वाले समाज का विवेक. इसलिए जरूरी है कि उसकी नैसर्गिक जिज्ञासा बनी रहे. उसके लिए किया क्या जाए? इसका उत्तर प्रायः हमारे पास नहीं होता. परंपरा और संस्कृति के दबाव में हम जो करते हैं, वह अकसर विपरीत परिणाम देने वाला होता है. शायद इसलिए कि हम बालक को जरूरत से ज्यादा...

August 25, 2018

आया राखी का त्योहार ।
लाया खुशियों का त्योहार ।

बच्चे - बच्चे पुलक रहे हैं राखी बंधवाएगे ,
अपनी  बहनों से हम मंगल टीका करवाएंगे ।
लाया खुशियोअं की बौछार
आया राखी का त्योहार ।।

डाल - डाल पर फूल खिले , गाए खुशी के गीत,
राखी का संदेश सुनाए भाई - बहन की प्रीत ।
नाचे पूरा ये संसार ।
आया राखी का त्योहार...

प्राणेश आज पूरे पैंसठ वर्श का हो गया है. पता नहीं तड़के से एक रट लगाए कह रहा है - ‘फोन लगाओ न भाई साहब कविराज प्रोफेसर अयोध्या प्रसाद चतुर्वेदी को. इनाम मिलने की मुबारिकवाद दें और उन्हें कहें कि प्राणेश तो उन्हें भूला नहीं होगा. यह भी कहें उन्हें - कश्मीर विश्विद्यालय में रिसर्च करते हुए जिस कविता पो...

    ऐली बड़ी तन्मयता से अपने सिंगारदान के सामने खड़ी होकर अपने बाल बना रही थी. बड़े क़ायदे से उसने साड़ी बांधी. पूरा ख़ूबसूरत मेकअप किया. क्या काजल, क्या आई-लाईनर, क्या लिपस्टिक, क्या लिप-लाईनर, क्या फ़ेस फ़ाउन्डेशन, क्या हल्की मैचिंग जूलरी, एक एक चीज़ पर पूरा वक़्त ख़र्च कर रही थी. ख़ुद को बड़ी करीने से सजाती...

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