... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

 चिड़िया की चहक वाली कॉल-बेल की आवाज़ मेरे मन में एक रस-सा घोल जाती थी - कोई आया  के शब्दों से मेरा अंतर भी चहक उठता था. ऐसा नहीं था की मुझे किसी विशेष का इंतज़ार होता हो. यह बेल तो बस घर की नीरवता को भंग करती थी. इसीलिए मुझे उसके चहकने का इंतज़ार रहता. घर में था ही कौन - मैं, पापा व हमारा पुराना नौकर र...

आखिर क्यों

आखिर क्यों मैं उसे पा नहीं सकती,
और क्यों ये बता नहीं सकती...
कि वो है मेरी धड़कन या मेरे मन का दर्पण,
फिर क्यों इस मन के दर्पण में उसकी तस्वीर बना नहीं सकती...
अगर बन जाए प्रतिबिम्ब उसका,
 तो क्यों ये दर्पण उसे दिखा नहीं सकती....

अनजान हूँ इस सफ़र में,
और वो है जानी पहचानी डगर तो क्यों उसे...

शरद ऋतु की अपनी ही सुन्दरता है. इस दुनिया की सारी रंगीनी श्वेत-श्याम हो जाती है. हिम की चांदनी दिन रात बिखरी रहती है. लेकिन जब बर्फ़ पिघलती है तब तो जैसे जीवन भड़क उठता है. ठूँठ से खड़े पेड़ नवपल्लवों द्वारा अपने जीवंत होने का अहसास दिलाते हैं. और साथ ही खिल उठते हैं, किस्म-किस्म के फूल. रातोंरात चह...

ई-कल्पना पत्रिका की बेहतरीन कहानियाँ अब ऐमेज़ौन पर उपलब्ध हैं - लिंक https://www.ekalpana.net/paanchkahaniaan

संकलन 1 में -
खुशनसीब - सविता चड्ढा
सच और सपनों के बीच - जानार्दन
इक आग का दरिया है - उद्भ्रांत
अलविदा - मनोहर चमोली मनु
अनकहा आख्यान - जया जादवानी

संकलन 2 में
चतुर्भुज – सुदर्शन वशिष्ठ
पाप और...

बहुत छोटी उम्र में उसे बड़ी समझ आ गई।

    लैहणू हलवाई का बिगड़ा हुआ छोकरा जिद्द करने लगा, वह अपना मिठाई का पुश्तैनी धंधा छोड़ नामी लेखक बनेगा। यूं तो उसके दादा भी आशूकवि थे। मिठाई तौलती बार तलत महमूद की गाई ग़ज़ल ‘‘जलते हैं जिसके लिए तेरी आंखों के दीये’’ गाते हुए अपनी शायरी कर बैठते ‘‘तलते हैं जिसके लिए,...

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