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शहीद-ए-आजम भगत सिंह

भारत माता जब रोती थी, जंजीरों में बंध सोती थी .

पराधीनता की कड़ियाँ थीं, जकड़ी बदन पर बेड़ियाँ थीं .

देश आँसुओं में रोता था, ईस्ट इंडिया को ढ़ोता था .

भारत का शोषण होता था, नैसर्गिक संपत्ति खोता था .

दुर्दिन के दिन गिनता था, हर साल अकाल को सहता था .

अंग प्रत्यंग जब जलता था, घावों से मवाद र...


नील, पीत, हरित रंग 
हुलसित हिलोर संग 
होली के ढोल बाजें 
फागुनी बयार में 

कोयल की कूक मधुर 

मुदित मन उमंग आज 

पिचकारी तेज धार 
रंग की बौछार डार 
नाज़-नखरे छोड़ चली 
प्रिय को मलने गुलाल 

मन के गलियारों में 
धूम खूब मची आज 

मेघा भिगोए गए 
रात ही समूच धरा 
आनन्द विभोर हुई
चूनर छिटकाए हरा

टेसू के फूल खिले 
होल...

बचपन

दशकों पहले एक बचपन था

बचपन उल्लसित, किलकता हुआ

सूरज, चाँद और सितारों के नीचे

एक मासूम उपस्थिति

बचपन चिड़िया का पंख था

बचपन आकाश में शान से उड़ती

रंगीन पतंगें थीं

बचपन माँ का दुलार था

बचपन पिता की गोद का प्यार था

समय के साथ

चिड़ियों के पंख कहीं खो गए

सभी पतंगें कट-फट गईं

माँ सितारों में जा छिपी

पिता सूर्य में...

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