... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ई-मेल में सूचनाएं, पत्रिका व कहानी पाने के लिये सब्स्क्राइब करें (यह निःशुल्क है)

फरवरी 2016 में जब हमने अपना पहला अंक प्रकाशित किया था, तब हमारा उद्देश्य उच्च-स्तरीय और मनोरंजक हिन्दी कहानियों को प्लेटफौर्म देना था. तब इंटरनैट में हिन्दी की कई और अच्छी लिटरैरी पत्रिकाएं थीं. आज और भी बढ़ गई हैं. उम्मीद है कि ये संख्या लगातार बढ़ती रहेगी. पाठकों और लेखकों के लिये ये एक विन-विन स्...

हर ब्राण्ड के जूते की, अपनी किस्मत,

अपना मान और उचित स्थान होता है|

किसी को पैर तक भी, नसीब नहीं होता,

और कोई जूता, सर तक, चढ़ जाता है|

जूता, सर तक, क्यों कर, चढ़ जाता है?

उसे पता होता है, कि, कहाँ तक जाना है|

उसका इस्तेमाल, किसने कब, कैसे किया है,

        कभी उठाकर, कभी चाट कर, कभी मारकर|...

Please reload

eKalpana literary magazine

​​Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

सभी रचनाएं
ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें
Please reload

Please reload