... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

गुज़रे समय की
जो लकीरें रह गयीं 
आज भी आकर 
विगत की बन्द गठरी खोलकर 

भाव विव्हल चेतना को 
हैं जगा जातीं निरन्तर 

साज़ झंकृत हैं प्रणय के 
रागिनी बजती ह्रदय में 

गुज़रता प्रति पल समय 
ज्यों नीर सरिता बह रहा 
परछाई सुःख-दुःख देखता 
कद ज़िंदगी का घट रहा 
एक नन्ही कंकड़ी 
बिखरा गयी साया तलक़ 

नीर बहता ही गया
मिलन...

  • ताज नगरी में हुआ विश्व मैत्री मंच भोपाल का सातवां राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मेलन 

  • देश भर से जुटे 75 कवि साहित्यकार, विमर्श के केंद्र में रही लघुकथा

विश्व मैत्री मंच भोपाल द्वारा  वैभव पैलेस ऑडिटोरियम आगरा में 7 वां राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया. देश भर से 75 साहित्यकारो...

पूर्ण प्रेम होता है

संवेदना होती है

तब प्रभाव नहीं होता

जब प्रभाव होता है

संवेदना नहीं और

प्रेम भी नहीं होता

रिश्तों की पूर्णता

केवल प्रेम में है और प्रेम

शरीरी से अशरीरी तक !

कोई कितना भी नकारें

तत्त्वज्ञान की पोथी पढ़ें

प्रेम केवल प्रेम है

वहीं से अध्यात्म उठा लें

तब केवल प्रेम से चरम तक

परम प्रेम में लीन होना

*

प...

ज़िंदगी की

प्रत्येक अनचाही घटनाओं के

साँचे में वो खुद को

ढाल रहा था...

लोग भी चाहते थे -

वो हमेशा उन्हीं साँचों में

फँसा रहे...

कभी अपनी मर्ज़ी से

खुद को ढालने न पाएं

उनकी कोई निजी पहचान

कभी न बना पाएं...

क्योंकि -

उनके पास न सत्ता थी,

न धन था और न थी खरीदी हुई

शोहरत !

उनका कुसूर था -

वो संस्कारी था, नॉन करप्ट था

सरल...

अस्तित्त्व के

बिखरे हुए टुकड़ों को

समेटने की कोशिश

जीवनभर करता रहा

बहुतों ने नोच लिया है

फिर भी कोशिश जारी थी

मगर अब थक गया हूँ

सोचता हूँ कि जिन्हों ने

आजतक जिस्म की बोटी बोटी

भी न छोड़ी है उन्हें अब रोककर

क्या करूँगा मैं !

जिस्म का अस्तित्त्व टुकड़ों में

हड्डियाँ गली हुई सी सूखती

चमड़ी तो पहली उधेड़ दी थी

क्या बचा पा...

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