... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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 दोपहर का समय, फिर भी हल्की-हल्की धूप खिली है। फाल्गुन का उत्सव, होली का दिन चारों ओर धूम-धम्क्कड़ ढोल-नगाडों के साथ नाचती-गाती युवकों की मंडली जोर-जोर से चिल्लाती –“होली है। - बु...


पुस्तक :  स्वर्णपात्र ( वैदिक कविताएँ)
रचनाकार: डॉ.मुरलीधर चांदनीवाला,
               'मधुपर्क' ७ प्रियदर्शिनी नगर,रतलाम ४५७००१
               संपर्क: (०७४१२)२६३१४२, मोबाइल: ९४२४८६६४६०...

विधा की रातों की नींद मानों उससे आईस्पाई खेल रही थी.कभी वह उठ कर बालकनी में टहलने लगती कभी बोतल से पानी पीती और कभी लेट कर जबरदस्ती आंखे बन्द कर सोने का प्रयास करती.पर नींद भी कम चतुर न थी उसके हाथ न आती.

तीसरी बार जब वह बिस्तर से उठी तो राजुल ने कहा ‘‘ सो जाओ यार क्यों दिमाग खराब कर रही हो ’’

विधा कै...

माना कि बहुत सुन्दर हो, अद्भुत और आकर्षक भी,

मेरे भावों के उद्वेग को झेलना आता है तुम्हें।

कभी प्रतिकार नहीं बल्कि हमेशा दिया साथ ही,

तुम में भरी है रंगीनियत,नीलाभ सा अंतर्मन।

कोई जितना चाहे रंग बिखेरे, तुम्हारा है खुला निमंत्रण।

मेरे मन के भाव बखूबी बयां होते तुमसे,

कोई कितनी भी कोशिश कर ले,

तुम पर है मे...

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