... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

October 19, 2019

रोल-नंबर दस?

किसी अनजान आदमी को स्वाभाविक ही प्रश्न उठे कि मैं रोल-नंबर नौ भूल ही गया, टीचर को ठीक से गिनती भी आती नहीं! लेकिन मुझे या मेरे वर्गखंड के बच्चों को इस बात का जरा भी आश्चर्य नहीं हो सकता। क्योंकि आठ के बाद हमेशा दस नंबर ही बोलना था। नौ नंबर तो विक्रम का था। और उसका नंबर मैं बोलूं या ना बो...

      ‘-रहने दो माँ, ये सब तेरी समझ में नहीं आयेगा.’

माँ मुझे असमंजस भरी निगाहों से देखती रही. उसकी व्याकुलता को रोकने के लिए मैंने बात आगे चलाई, ‘अच्छा हुआ माँ तुम आ गई, वरना यहाँ तो मैं बिलकुल अकेली पड़ गई हूँ.’ जितना हो सकता था उतनी सहजता से मैंने कहा.

‘अरे, तुम्हें तो मजे ही मज...

November 7, 2017

ट्रेइन चालु हुई कि उसी समय वो मेरे सामने की खिड़कीवाली सीट पर आ बैठी.  कुछ पल तो मैं देखता ही रह गया ... शिवानी? आँख मान ना पाए, वो ही होगी क्या ये? हो ही नहीं सकती ... कतई नहीं. वो कैसे हो सकती है? हालाकि लगती तो वोही है! बिलकुल उसके जैसी. जरा भी बदली नहीं होगी वो ... जरा भी! बिल्कुल वैसी की वैसी ह...

April 4, 2017

भास्करराय ने तबले पर थाप दी और चारों तरफ तबला गुंज उठा ... धातिर किटितक ... तिरकिट धूम्म् ... ऊम्म्म्म्.

उनको खयाल आता है कि सामने बैठे तबलावादन सीखने आये हुए सारे स्टुडन्ट्स बेरुखी से बैठे हुए है. किसी के चेहरे पे सीखने का लगाव नहीं. कुछ स्टुडन्ट्स का तो ध्यान भी बाल्कनी के उस पार फैले फ्लायओवर से स...

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अब हम ई-कल्पना जनवरी 2020 कहानी प्रतियोगिता के लिये कहानियाँ स्वीकार कर रहे हैं. कहानियाँ 1500 से 6000 शब्द तक की हों. कहानियाँ 15 दिसम्बर 2019 तक स्वीकार की जाएँगीं.
पुरस्कार राशि -
प्रथम चुनी ₹ 3000
द्वितीय चुनी ₹ 2000
तीसरी चुनी कहानी ₹ 1000
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