... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

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“कैसी है अब जानकी? क्या हुआ था उसे? अभी दो दिन पहले तक तो ठीक थी? अचानक ऐसे क्या हो गया? किस वार्ड में भरती है? इतना सब कुछ हो गया और आपने हमें फ़ोन करके बतलाना तक उचित नहीं समझा? क्या हम इतने पराए हो गए हैं? अगर उसे कुछ हो जाता तो हम तुम्हें जिन्दगी भर माफ़ नहीं करते.”

वे क्रुद्ध सिंहनी की तरह दहाड़ रह...

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