... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

मैं नजीब । बैठा हूँ। आख़री सड़क के आख़िरी छोर पर जो एक छोटा सा डब्बा जैसा कुछ दिख रहा है न। वहीँ। उसी डब्बे के अंदर,  कोने में। दुबककर। छिपकर। कोई छुए नही। ऐसे ही पड़े  रहने दें।

उम्र? 

सत्ताईस साल। अब तक नौकरी मिल जानी चाहिए थी। नौकरी की बेचैनी मुझे क्लास आठ से है। आख़िर नौकरी मिलना इतना मु...

सवालों की एक लम्बी फेहरिश्त है

जो तुमसे करने थे मुझे....

तबकी बार तुमने वैसा क्यों किया ?

और पिछली बार

अपनी बात से मुकर क्यों गए ?

पर बारी-बारी

एक--एक सवाल

टूटते गए

जैसे-जैसे तुम दूर हुए

सवालों के जवाब

ढूंढ लिए मैंने....

आज बैठा हूँ

बेहिस

अपने बुने हुए जवाबों के साथ

और तुमसे कुछ नहीं पूछना..... 

चंद्रभान,  जवाहरला...

ज़िन्दगी

लंबी साँस है

हवा को सीने में देर तक 

क़ैद करना 

साँसों के दरम्यान 

यादों की 

सुन्दर सी बुनाई 

कभी ठहाका 

कभी मुस्कराहट 

या कभी साँस छोड़ते हुए 

लंबी सी आह !

ज़िन्दगी 

आँखों में तालाब 

बसा लेना है 

ज़िन्दगी 

लमहात को स्पर्श कर पाना है 

ज़िन्दगी 

बेबयाँ  हैं 

कई बार शब्दों से परे है।

चंद्रभान,  जवाहरलाल नेहरू व...

नदी के किनारे

सबेरे सबेरे

ताज़ी  हवा को सीने में भरते हुए

टहलना चाहता हूँ

जीना  चाहता हूँ....

फिर से

बगीचे में

सूखे पत्तों पर

नंगे पाँव

फुदकना चाहता हूँ

घर लौटकर

माँ के  आँचल में दुबकना चाहता हूँ...

फैलना चाहता हूँ

आसमान के ओऱ तक

खेतों के अंत तक

पीपल के पोर पोर में

नदी में घुल जाना चाहता हूँ

हवा बन जाना चाहता हूँ

कई ब...

खाली नींद 

तैर रही 

कासा-ए-निग़ाह में....

इक नींद का वादा  दे दो 

कि अगला ख़्वाब 

मुझ अकेले का न हो 

मैं 

तुम 

सब 

शामिल हों (चंद्रभान)

(कासा=कटोरा )

चंद्रभान,  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के इतिहास अध्ययन केंद्र में प्राचीन इतिहास के शोधार्थी हैं।...

Please reload

Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

Please reload