... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

तबस्सुम फातिमा का संकलन "जुर्म" 18 फरवरी 2018 से ऐमेज़ोन (amazon.in) से प्राप्त किया जा सकता है. संकलन ऑर्डर करने के लिये - https://goo.gl/adBE8u

“मेरे यहां स्त्री पर हावी पुरुष मानसिकता को ले कर एक आक्रोश है. यह आक्रोश विश्व-पटल पर फैलती स्त्री चेतना और मज़बूती का प्रतीक है.” तबस्सुम फ़ातिमा कहती हैं.

लेकिन वे यह भी तो कहती हैं कि “हम उसे हर बार सपने देखने से पहले ही मार देते हैं...” हाँ, तबस्सुम जी में गुस्सा है, लेकिन उससे भी ज़्यादा मात्रा...

आज़ादी के बाद 3 पीढ़ियाँ बड़ी हो गईं और हम अपने वे सपने साकार भी नहीं कर पाए जो हमने खुद के लिये, अपने बच्चों के लिये और उनके बच्चों के लिये देख रखे थे. हमें पूरा यकीन था कि हम ऐसा समाज ज़रूर बना पाएंगे जहाँ एक लड़की अपनी मर्ज़ी से जी सके.

इस महिला दिवस में हम और सवाल नहीं पूछेंगे. 4 प्रबल लेखिकाओं क...

मैं एक उम्र के इन्केलाब को बहुत पीछे छोड़ आई थी. और इस बात से खौफजदा थी कि सहीफा बड़ी हो रही है. मैं उन दिनों को भूली नहीं थी जब मैं स्वयं सहीफा जैसी थी और मेरे फ़ैसले केवल मेरे फ़ैसले हुआ करते थे. मुझे याद है मम्मी-पापा मेरे हर फ़ैसले पर खौफज़दा हो जाया करते थे. उस समय मुझे मम्मी पापा की दुनिया एक अजी...

भारतीय महिला-कथा वाया सिमोन

                                  

हम आज़ाद होते हुए भी

कहां आजाद थे/

सदियों से हमारे बनाये जाने की

परम्परा का अन्त ही नहीं होता

शताब्दियों में एक परम्परा के अन्त से

दूसरी परम्पराओं का महा-जल बुन...

(2)

वो पैदा नहीं हुई थी

इसलिए वो प्रेम भी नहीं कर सकती थी/

संगीत के सातों सुर थे उसके पास

मगर वो संगीत नहीं सुन सकती थी/

पहले पहल इस संगीत को उसके होठों ने

खामोश किया/

फिर चुपके से दफ़्न करती गई वो/

उसे अपनी धज्जी-धज्जी सांसों में।

वो पैदा हुई ही नहीं थी/

इसलिए आप उसे रूकैया जहांगीर बुलाएं/

साजिदा ताहिर, संजीदा...

(1)

मै मासूमा आफरीदी

उम्र 22 साल/

मुझे देखने या तलाश करने की ज़रूरत

नहीं है/

इन वादियों में/

अब मैं नहीं मिलूंगी/

अब मैं यहां कहीं नहीं मिलूंगी/

दूर तक फैले पहाड़ों/ सरसब्ज़ वादियों/

सड़कों/बाज़ारों/

या स्कूलों में/

कहीं-नहीं मिलूंगी मैं/

तोप और टैंकर मिलेंगे सड़कों पर/

दूर तक एक कतार से जाते हुए/

असलहों से लैस वे जादू...

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