... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

गुजरात विश्वविद्ध्यालय के हिंदी विभाग द्वारा  हिंदी दिवस व  अस्मिता, महिला बहुभाषी साहित्यिक मंच, अहमदाबाद के स्थापना दशक कार्यक्रम  का  जिसकी अध्यक्षता की  हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. निशा रम्पाल जी ,निदेशक भाषा साहित्य डॉ .कमलेश चौकसी जी ने  ,में अस्मिता संस्थापक नीलम कुलश्रेष्ठ द्वारा  सम्पादित काव्यस...

नीलम कुलश्रेष्ठ की ऑडियो-कहानी - उस महल की सरगोषियाँ

नीलम कुलश्रेष्ठ का परिचय

kneeli@rediffmail.com

`` तर्णेतर ने  रे अमे में मेड़े जाता ...`` : ऋषि पंचमी पर आयोजित होने वाले गुजरात के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक मेले पर आधारित एक 'प्रेम कथा'

सुन्दर, सजीले उन आदिवासी युवकों का दल विशाल छाता पकड़े कितना उन्मत होता होगा? सफ़ेद बुर्राक़ कड़ियों व सफ़ेद कसे पायजामे में गुनगुनाते चलते होंगे. धूप में कड़ि...

'पैडमेन फ़िल्म के बहाने' ...

नीलम कुलश्रेष्ठ

मुझे लगता है फ़िल्म पैडमेन ने एक सामाजिक क्रांति कर दी है. लोग आज खुलकर स्त्रियों द्वारा मासिक धर्म या माहवारी या ऋतुचक्र या मेंस्ट्रुअल सायकल या संक्षिप्त में जैसा कि शहरों में कहा जाता है `एम.सी.’ या ‘महीने से`के समय उपयोग में लाये जाने वाले सेनेटरी नेपकिन्...

``साला उल्ला का पठ्ठा !सहर भर में कुछ देखने को पन नहीं मिलता जो तू इदर ताकता है ?``मंगी  ने खड़े होकर ऊपर उठी हुई धोती नीचे की व रेलवे लाइन के पास पड़े दो चार पत्थर उठाकर लाइन के समानांतर जा रही सड़क के उस पार खड़े साइकिल वाले पर दे मारे दनादन .

वो सायकिल वाला अपनी सायकिल रोककर उसे एक हाथ से पकड़े बेशर्मी...

``हलो मैडम !``

वह बिस्तर से अभी उठी ही थी कि चौंक गई. सुबह का धुँधलका अभी छँटा नही है, खिड़कियों के पर्दे अभी हटे  नहीं हैं, ये सभ्य व सुरीली आवाज़ कहाँ से आई ?

``हलो मैडम !ये मै हूँ, दरवाज़ा खोलिये.``

``ओ बाप रे!  तुम हो.``

उसने पीछॆ का दरवाज़ा खोल दिया, ``कल इतनी सुबह काम करने मत आना. ``

हंसा अन्दर आते ही...

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