... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

पूर्ण प्रेम होता है

संवेदना होती है

तब प्रभाव नहीं होता

जब प्रभाव होता है

संवेदना नहीं और

प्रेम भी नहीं होता

रिश्तों की पूर्णता

केवल प्रेम में है और प्रेम

शरीरी से अशरीरी तक !

कोई कितना भी नकारें

तत्त्वज्ञान की पोथी पढ़ें

प्रेम केवल प्रेम है

वहीं से अध्यात्म उठा लें

तब केवल प्रेम से चरम तक

परम प्रेम में लीन होना

*

प...

ज़िंदगी की

प्रत्येक अनचाही घटनाओं के

साँचे में वो खुद को

ढाल रहा था...

लोग भी चाहते थे -

वो हमेशा उन्हीं साँचों में

फँसा रहे...

कभी अपनी मर्ज़ी से

खुद को ढालने न पाएं

उनकी कोई निजी पहचान

कभी न बना पाएं...

क्योंकि -

उनके पास न सत्ता थी,

न धन था और न थी खरीदी हुई

शोहरत !

उनका कुसूर था -

वो संस्कारी था, नॉन करप्ट था

सरल...

अस्तित्त्व के

बिखरे हुए टुकड़ों को

समेटने की कोशिश

जीवनभर करता रहा

बहुतों ने नोच लिया है

फिर भी कोशिश जारी थी

मगर अब थक गया हूँ

सोचता हूँ कि जिन्हों ने

आजतक जिस्म की बोटी बोटी

भी न छोड़ी है उन्हें अब रोककर

क्या करूँगा मैं !

जिस्म का अस्तित्त्व टुकड़ों में

हड्डियाँ गली हुई सी सूखती

चमड़ी तो पहली उधेड़ दी थी

क्या बचा पा...

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लेखकों के लिये
अब हम ई-कल्पना जनवरी 2020 कहानी प्रतियोगिता के लिये कहानियाँ स्वीकार कर रहे हैं. कहानियाँ 1500 से 6000 शब्द तक की हों. कहानियाँ 15 दिसम्बर 2019 तक स्वीकार की जाएँगीं.
पुरस्कार राशि -
प्रथम चुनी ₹ 3000
द्वितीय चुनी ₹ 2000
तीसरी चुनी कहानी ₹ 1000
कोशिश करें की कहानियाँ यूनिकोड में हों.
 
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