तू तेरे निर्मित इस जग में 

क्यूँ मुँह छिपाया फिरता है 

तन केंचुली के अंबार चँढ़ा 

क्यूँ खुद से ही खुद डरता है 

तू तो अजेय के लिए चला 

पर यात्रा कैसी बना डाली 

खुद की लंका खुद ने ही

एक पल में ही जला डाली

तू भूल गया उसको जिसने

इस सृष्टि का निर्माण किया 

तुझको भी भेजा था उसने 

अलौकिक जो संधान किया 

आकर, पाकर जन्म...

जब छोटू पड़ोस के भाईसाहब के यहाँ खेलने जाने को होता तो उसकी माँ ये कहकर मना कर देती कि बेटा, उनसे अपनी लड़ाई हो रही है, उनके यहाँ खेलने नहीं जाते,  ये सुनकर, नन्हा सा बालक मन मसोसकर रह जाता। पर कुछ अन्य घरों के बालक यदा-कदा खेलने आ जाया करते थे। पापा जी से मिलने वालों की कतार भी लगी रहती थी घर पर। स...

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