... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

 चिड़िया की चहक वाली कॉल-बेल की आवाज़ मेरे मन में एक रस-सा घोल जाती थी - कोई आया  के शब्दों से मेरा अंतर भी चहक उठता था. ऐसा नहीं था की मुझे किसी विशेष का इंतज़ार होता हो. यह बेल तो बस घर की नीरवता को भंग करती थी. इसीलिए मुझे उसके चहकने का इंतज़ार रहता. घर में था ही कौन - मैं, पापा व हमारा पुराना नौकर र...

तबस्सुम फातिमा का संकलन "जुर्म" 18 फरवरी 2018 से ऐमेज़ोन (amazon.in) से प्राप्त किया जा सकता है. संकलन ऑर्डर करने के लिये - https://goo.gl/adBE8u

आज़ादी के बाद 3 पीढ़ियाँ बड़ी हो गईं और हम अपने वे सपने साकार भी नहीं कर पाए जो हमने खुद के लिये, अपने बच्चों के लिये और उनके बच्चों के लिये देख रखे थे. हमें पूरा यकीन था कि हम ऐसा समाज ज़रूर बना पाएंगे जहाँ एक लड़की अपनी मर्ज़ी से जी सके.

इस महिला दिवस में हम और सवाल नहीं पूछेंगे. 4 प्रबल लेखिकाओं क...

बाहर गहरा घना अँधेरा था - कुछ साफ़ दिख नहीं रहा था, पर गाड़ी की गति धीमी पड़ रही थी - लगता था  कोई स्टेशन आने वाला है. प्लेटफार्म पर पहुँचते-पहुँचते गाड़ी की गति इतनी धीमी हो गई थी कि उसके  रुकने का  अहसास तक नहीं हुआ. प्लेटफार्म पर दीये की तरह टिमटिमाते बल्ब की रौशनी में पेड़ों की लम्बी-लम्बी छायाएँ ही...

चिड़िया की चहक वाली कॉल बेल की आवाज़ मेरे मन में एक रस-सा घोल जाती थी - 'कोई आया' के शब्दों से मेरा अंतर भी चहक उठता था. ऐसा नहीं था की मुझे किसी विशेष का इंतज़ार होता हो. यह बेल तो बस घर की नीरवता को भंग करती थी. इसीलिए मुझे उसके चहकने का इंतज़ार रहता. घर में था ही कौन - मैं, पापा व हमारा पुराना नौकर र...

जब तक मैं आपके पास रही कभी भी अपने मन की बात आपसे नहीं कही. ऐसा नहीं था कि कहना चाहा नहीं, परंतु कह नही सकी. कहने का साहस ही नहीं हुआ. हर दूसरे-चौथे रोज़ मैं आपके घर जाती, आपसे बात करने का इरादा भी मैंने कई बार किया था, पर हर बार......

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