... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

लेखक परिचय

ओम प्रकाश कश्यप

जो आत्मलीन रहकर लिखते हैं, उनका वास्तविक परिचय उनके शब्द होते हैं. वे कृतियां भी जिन्हें उन्होंने खुद से संवाद करते हुए रचा है. मैं खुद को ऐसा ही लेखक पाता हूँ. इसका नुकसान तो पता नहीं लाभ काफी हुआ है, सदा वही लिखा जो मन को भाया. कम छपा पर गम नहीं किया. जिस परिवेश से आना हुआ उसमें जन्मतिथि प्राइमरी स्कूल में दाखिले के समय तय की जाती है. अपना जन्म जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश के एक गांव में हुआ था. जन्मतिथि ‘पंडिज्जी’ ने तय की—15 जनवरी 1959. न माता-पिता ने विरोध किया था, न ही अपुन ने. उसी के साथ गाँव की मिट्टी में, खेत-खलिहानों के बीच पला-बढा. दर्शन में परास्नातक और दूसरी डिग्रियां प्राप्त कीं. अलाव किनारे बैठ किस्सा-कहानी सुनकर गुनना सीखा. जमीन से जुड़ाव वैचारिक प्रतिबद्धता का कारण बना. गांव में जातिवाद ने विद्रोही बनाया. धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड ने नास्तिक. लेखक बनने का सपना था, कितना फला—, समझने में देर है.

 

फिलहाल शब्दों से दोस्ती को 40 वर्ष बीत चुके हैं. इस दोस्ती ने पांच उपन्यास, चार कहानी संग्रह, चार नाटक संग्रह दिए हैं. इनके अलावा लघुकथा, व्यंग्य, समीक्षा, विज्ञान, कविता, बालसाहित्य, समाजवाद, सहकारिता दर्शन पर वैचारिक पुस्तकें नाम की हैं. जिनकी संख्या 40 से अधिक है. वैचारिक निबंधों का ब्लाग ‘आखरमाला’ है. उसपर दो सौ से ऊपर आलेख, 3000 पृष्ठों की सामग्री के रूप में सुरक्षित हैं. दो-तीन ब्लॉग और हैं जिनपर कथासाहित्य और बालसाहित्य को जगह मिली है. हिंदी अकादमी, दिल्ली(2002) तथा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान( 2013) द्वारा सम्मानित.

ओमप्रकाश कश्यप

जी-571, अभिधा, गोविंदपुरम,

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, पिन-201013

दूरभाष : 9013 254 2 32    

Email. opkaashyap@gmail.com

आखरमाला : omprakashkashyap.wordpress.com