... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ई-कल्पना पत्रिका की बेहतरीन कहानियाँ

अब कहानी संकलनों के रूप में

"पाँच कहानियाँ"

इन्हें आप बस, ट्रेन या प्लेन के लम्बे सफर में पढ़िये, या ऑफिस जाते वक्त मैट्रो में,

या फिर अपने घर की आराम कुर्सी पर बैठ कर ...

अपने फोन पर, या आई-पैड पर ...

"पाँच कहानियाँ" के हर संकलन की हर कहानी आपका जी लुभा लेगी ...

हर कहानी लिंक क्लिक करके पढ़ी जा सकती है ...

इन संकलनों को आप खरीद भी सकते हैं ...

ई-कल्पना के पहले व दूसरे वॉल्यूम में प्रकाशित कहानियों में सबसे बेहतरीन कहानियों के संकलन अब उपलब्ध हैं!

उद्भ्रांत से बातचीत (4 अप्रैल, 2016)

क़ैस जौनपुरी से विडियो साक्षात्कार 4 जुलाई 2016

जया जादवानी साक्षात्कार (1 अगस्त, 2016)

सुषम बेदी से वार्तालाप (1 अगस्त, 2016)

सुदर्शन वशिष्ठ साक्षात्कार (3 अक्टूबर 2016)

जानार्दन से बातचीत (2 जनवरी, 2017)

संतोष श्रीवास्तव साक्षात्कार (4 जुलाई 2016)

प्रवीण त्रिपाठी विडियो बातचीत (7 मार्च, 2016)

अनुपमा तिवाड़ी - साक्षात्कार (6 जून 2016)

ज़िन्दगी का सफरनामा - अनुपमा तिवाड़ी (6 जून 2016)

जीना इसी का नाम है - पीयूष कुमार द्विवेदी - 'विकलांग कवि' (5 जनवरी 2019)

डॉ मनोज मोक्षेन्द्र - साक्षात्कार (2 मई 2016)

चार महिला लेखिकाएंं ... चार अद्भुत आवाज़ें ... चार चिनार - ई-कल्पना किताब प्रकाशन (मार्च 2018)

मनोहर चमोली - साक्षात्कार (4 अप्रैल 2016)

 

जुलाई कौन्टैस्ट विशेषांक -2

इस संकलन में -

चार सम्मानित कहानियाँ

1. सोई हुई गली - मनीष कुमार सिंह (पुरस्कृत)

2. बदलते रंग - रश्मि शील (पुरस्कृत)

3. जिन्न की वापसी - सौरभ

4. विष का प्याला - प्रो. राजेश कुमार

निर्णायक कहानी

वो मीठा दर्द - पंकज त्रिवेदी

पुरस्कृत लघु कहानी

भिखारी - धीरज कुमार श्रीवास्तव

 

जुलाई कौन्टैस्ट विशेषांक -1

इस संकलन में -

तीन सम्मानित कहानियाँ

1. रोल नम्बर 9 - अजय ओझा (पुरस्कृत)

2. जूते की नोक पर - डॉ रमाकांत शर्मा (पुरस्कृत)

3. बीस वर्ष बाद - मनमोहन भाटिया

दो सम्मानित लघु कहानियाँ

1. सुहाग की चूड़ी - मीरा जैन (पुरस्कृत)

2. आम के तोते - डॉ अनिल भदौरिया

लघु कहानी (निर्णायक रचना )

बिग-क्लाउड-2068 - अनुराग शर्मा

"समाज के नवोदित एवं 'भूले बिसरे' लेखकों से समान रूप से धाराप्रवाह मनभावन कहानियाँ कहलवाना ऐसा ही है जैसे उपवन में फूलों को बिना नुक़सान पहुँचाए शहद एकत्रित करना. उन्हें परिष्कृत रूप मैं प्रकाशित करना और इस शहद को 'फ़ूड फ़ोर थॉट' के रूप मैं सुसाहित्य के 'प्यासे' पाठकों को स्वस्थ मानसिकता के से, सुरचिपूर्ण ढंग से परोसने के लिए - E कल्पना को शत शत बधाइयाँ !!!" --- डॉ, अनिल सक्सेना
 

"वाह! "
-- प्रेम पाल सिंह

इ-कल्पना मैगज़ीन कुछ समय से ही पढ़ना प्रारंभ किया है लगभग दो माह से... पर क़ायल हो गई मैं इसकी। उत्तम कहानी लेख ... अतुल्यनीय है। 
बहुत धन्यवाद एक सार्थक मनोरंजक आकर्षक मैगज़ीन की कल्पना को साकार करने के लिये🙏
पाठिका प्रेषिका :- कुसुम सोगानी इंदौर

 

कलात्मक मुखपृष्ठ ,स्तरीय रचनाएँ ...  बधाई।

संतोष श्रीवास्तव्

 

बधाई।
दिविक रमेश