• विश्वंभर व्याग्र

विश्वंभर व्याग्र की दो कविताएँ


अरे बावरे *********

भौर सुहानी कहे कहानी

सुखी रहे हर इंसानी सूरज सबका चंदा सबका बाँट न सकते हिस्सा नभ का छोड़ जायेगा तोड़ जायेगा बंधन सारे अरे बावरे... ********** जो खेता है बिन पानी के नाव हमारी कभी विचारी खोजा उसमें जिसमें लय सब समझेगा कब तेरा जीवन कृपा है उसकी हर पत्ता हिलता कृपा से जिसकी आस पास है वो ही खास है अनुभूति कर क्यूँ निराश है.... ********** जड़ चेतन में तन में मन में हर कणकण में विद्यमान है सुबह में वो और शाम में अल्ला में वो और राम में हर हलचल में हर पलपल में आज में भी रहेगा कल में जो कारण है बनने का भी मिटने का भी जो कारण है ********** बनना मिटना उसकी इच्छा कारण जो भी आये उसको समझ परीक्षा जितना जीवन जीले उसको जाना एक दिन तय है सबका सो के जागो अरे अभागो...

मैं कवि -----------------------------

कभी अक्षर की खेती करता कभी वस्त्र शब्दों के बुनता बाग लगाता स्वर-व्यंजन के मात्राओं की कलियां चुनता मैं कवि, कृषक के जैसा करता खेती कविताओं की और कभी बुनकर बन करके ढ़कता आब नर-वनिताओं की भूत-भविष्य-वर्तमान सभी तीनों काल मिले कविता में बर्फ के मानिंद ठंडक मिलती ताप मिलेगा जो सविता में मैं भविष्य का वक्ता मुझको सूझे तीनों काल की बातें मेरी ही कविता को गायक कैसे-कैसे स्वर में गाते वेद पुराण गीता और बाईबल ये सब मेरे कर्म के फल है डरते मुझसे राजे-महाराजे कलम में मेरी इतना बल है

-विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र' जन्म तिथि :-01/01/1965 पता-कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी , स.मा.(राज.)322201 मोबाइल-9549165579 विधा - कविता, गजल , दोहे, लघुकथा, व्यंग्य-लेख आदि सम्प्रति - शिक्षक (शिक्षा-विभाग) प्रकाशन - कश्मीर-व्यथा(खण्ड-काव्य),कौन कहता है...(काव्य-संग्रह) एवं मधुमती, दृष्टिकोण, अनन्तिम, राष्ट्रधर्म, शाश्वत सृजन, जयविजय, गति, पाथेय कण, प्रदेश प्रवाह, सुसंभाव्य, शिविरा पत्रिका, प्रयास, शब्दप्रवाह, दैनिक नवज्योति आदि पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित | प्रसारण - आकाशवाणी-केन्द्र स. मा. से कविता, कहानियों का प्रसारण । सम्मान - विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मान प्राप्त | चलभाष -9549165579 ईमेल :-vishwambharvyagra@gmail.com

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