• मनमोहन भाटिया

"सजनवा बैरी हो गए ..."

कमला ने कुढ़ते हुए कपड़े उठाए और चार कोठी छोड़ कर गली के नुक्कड़ में एक पेड़ के नीचे इस्त्री करती धोबन कोयल की मेज पर पटक दिए।

"लाडो बड़ी गर्म लग रही है, क्या हुआ?"

"आराम से इस्त्री कर तब तक जरा पान चबा लूं।"

कोयल की मेज पर एफएम रेडियो में गाना बजा "सजनवा बैरी हो गए हमार" गाना सुनते ही कमला झूम उठी "गाना सुनकर कलेजे को ठंडक पड़ गई कोयल, बड़ा मीठा गाना है। कमाल का लिखा है लिखने वाले ने और गाने वाले ने "करमवा बैरी हो गए हमार"

"क्या हुआ मरदुआ फिर भाग गया।" कोयल ने कपड़ों की इस्त्री रोकते हुए कमला से पूछा।

"तूने काम क्यों रोक दिया, यहाँ तो हर रोज की बात हो गई है, मर्जी होती है भाग जाता है फिर खीं-खीं करता वापिस आ कर कसमें खाने लगता है। गया तो गया।" कमला ने पान की पीक पेड़ पर मारते हुए कहा।

"हाय हाय मरदुआ तेरा भागा है और पत्ते पेड़ के लाल हो गए।" कोयल ने खाने का टिफिन खोला और कमला से पूछा "खाना खा ले।"

"तू खा ले, मैं तो मोटी फुटबॉल का देसी घी वाला खाना खाऊँगी।"

"मौज है तेरी, कम से कम खाना तो बढ़िया मिलता है।"

"तभी मोटी फुटबॉल के घर टिक कर काम कर रही हूँ वरना एक नंबर की वाहियात औरत है।"

"क्या हुआ?"

"बोलने की तमीज नही है। साली गली गलौच की भाषा में बात करती है। जितनी चर्बी बदन पर है उससे दुगनी चर्बी दिमाग में है।"

"तू आराम से बैठी है फुटबॉल तेरा इंतजार कर रही होगी। तेरे कपड़े इस्त्री कर देती हूँ।" कोयल ने खाने के पश्चात कुल्ला करते हुए कहा।

"कर दे, साली ने किट्टी पार्टी में जाना है।"

कपड़े इस्त्री कराने के पश्चात कमला गाना गुनगुनाते हुए कोठी में प्रवेश करती है "सजनवा बैरी हो गए हमार"

कमला को गाना गुनगुनाते देख कर अवीना आगबबूला हो जाती है "इतनी देर क्यों लगा दी, धोबन के संग गप्पें ठोक रही होगी। तुझे कहा था न कि मुझे पार्टी में जाना है और देर करा कर ही दम लेगी। तुझे कितनी बार कहा है कि ये सड़े हुए गाने मेरे सामने नही गया कर।"

आधे घंटे बाद अवीना सजधज के किट्टी पार्टी में चली गई। पांच मिनट बाद अतुल शर्मिला के साथ आ गया।

"मेमसाब?" अतुल ने कमला से पूछा।

"मेमसाब पार्टी में गई।"

"कब?"

"अभी पांच मिनट पहले।"

"ठीक है मैं ऑफिस में हूँ।" अतुल शर्मिला के संग कोठी के बेसमेंट में बने ऑफिस में चला गया। अतुल और शर्मिला के ऑफिस में जाने के पश्चात कमला ने फिर से गाना गाया "सजनवा बैरी हो गए हमार...बलमवा सौतन के भरमाए" गाना गाते हुए कमला ने छक कर खाना खाया और फिर बेसमेंट में जा कर अतुल से पूछा "साहब चाय, कॉफ़ी?" अतुल शर्मिला के साथ चिपक कर बैठ प्रेम की पींगे बढ़ा रहा था। कमला को देखते ही अतुल बिगड़ गया "तुझे कितनी बार कहा है जब मैं ऑफिस में काम कर रहा हूँ तो मुझे डिस्टर्ब नही करना है।"

"साब जी मैं तो चाय, कॉफ़ी...।"

"कुछ नही चाहिए, तू फूट ले।"

कमला ऑफिस से निकल कर बेसमेंट की सीढ़ियों में रुक कर अतुल और शर्मिला की बातें सुनने लगी।

"अतुल बेबी तुम इस निकम्मी नौकरानी को निकाल क्यों नही देते, बहुत डिस्टर्ब करती है।"

"डार्लिंग साली मोटी फुटबॉल के मायके से आई है वरना एक लात मार कर एक मिनट में निकाल दूँ।"

अतुल और शर्मिला प्रेमालाप करने लगे और कमला उनकी बातें सीढ़ियों में बैठ कर सुनती रही। कोयल ने पीछे से कमला की पीठ थपथपा कर कान में फुसफुसाया "क्या सुन रही है?" कमला कोयल के साथ कोठी से बाहर आ कर एक कोने में खड़े हो कर गुनगुनाती है "बलमवा सौतन के भरमाए"

"तेरा मरदुआ चार दिन से घर नही आया और तू मस्त गाने गा रही है।" कोयल ने कमला से पूछा।

"कोयल रानी सारे मरदुये एक जैसे होते हैं। मेरा मरदुआ हो या मोटी फुटबॉल का मरदुआ सब दूसरी औरतों के पीछे मर रहे हैं तभी तो मैं खुश रहती हूँ जहाँ मर्जी मरें, ससुरे आखिर में खुशामद हमारी ही करते हैं और नाक रगड़ते है।"

"देख मेरे मरदुये को देख, दिन दहाड़े पौआ पी रहा है और मैं मेहनत कर रही हूँ। तू सही कह रही है कि सारे मरदुये एक समान हैं।"

"लगा दे गर्मा गर्म प्रेस, नशा उतर जाएगा।"

"नशा तो उतर जाएगा फिर डॉक्टर से दवा के पैसे भी मेरे से ले मरेगा।"

"ये जो अतुल बाबू हैं न इनका पूरा चक्कर आइटम गर्ल से चल रहा है।"

"आइटम गर्ल कौन?"

"अरे वही मिनी स्कर्ट वाली जो चिपकी हुई है।"

"आइटम गर्ल नाम बढिया रखा है।"

"नाम उस मोटी फुटबॉल ने ही रखा है। जब मोटी फुटबॉल घर पर नही होती है तभी आती है। इधर से मोटी फुटबॉल की कार निकली और पांच मिनट में अतुल आइटम गर्ल के साथ आ गया। अच्छा मैं चलती हूँ, मोटी फुटबॉल के आने का समय हो गया है।"

खूबसूरत लंबे कद के अतुल का आकर्षक व्यक्तित्व हर किसी को अपनी ओर खींचने में सक्षम था। कॉलेज में कई लड़कियां अतुल की ओर आकर्षित थी लेकिन अतुल की पसंद अवीना थी। दूसरी लड़कियों को अतुल की पसंद पर आश्चर्य और हैरानी हुई कि अतुल इतनी खूबसूरत लड़कियों को छोड़ एक बेमेल लड़की के पीछे पागल हो रहा है। अवीना गोरी तो थी लेकिन अवीना मोटी थी। अवीना के मोटापे के कारण वह कॉलेज में वाइट फुटबॉल के नाम से मशहूर थी। गोल मटोल अवीना पर लट्टू होने का मुख्य कारण उसका अमीर होना था। कॉलेज में अवीना मर्सिडीज कार में आती थी और अतुल बस में। अतुल एक मध्यवर्गीय परिवार से था। अतुल के पिता एक ठेकेदार थे जो भवन निर्माण से जुड़े हुए थे। अतुल की माँ गृहिणी थी और एक छोटा भाई और बहन भी थी। मध्यवर्गीय परिवार में कमी तो कोई नही थी लेकिन मजबूरियां अवश्य होती हैं जब अपनी इच्छा को दबा कर परिवार की प्राथमिकता देखनी होती है। अतुल के पिता के पास एक पुराना स्कूटर था जिस पर कभी पूरा परिवार सफर करता था जब अतुल छोटा था। अतुल का छोटा भाई पिता जी के साथ आगे खड़ा होता था, अतुल माँ और पिता के बीच में बैठता था और छोटी बहन माँ की गोद में बैठती थी। अतुल लोगों की कार देख कर सोचता ही रह जाता था कि काश कभी वह भी कार में बैठे और अपनी अधूरी खवाहिश को पूरा करने के लिए अतुल ने अवीना से मित्रता की। अवीना अतुल से बड़ी थी और जब अतुल बीए कर रहा था तब अवीना एमए कर रही थी। अवीना भी दूसरी लड़कियों की तरह अतुल की ओर आकर्षित हुई। अतुल ने अवीना की नजदीकी को तुरंत भुनाया और अवीना को अपने प्रेमजाल में गिरफ्त कर लिया। चाहे अवीना के परिवार में रुपये की कोई कमी नही थी लेकिन फुटबॉल जैसी गोल मटोल अवीना को खूबसूरत हैंडसम हंक जैसा दूल्हा मिलने में दिक्कत आ रही थी। अतुल ने इस अवसर पर अवीना के सामने विवाह प्रस्ताव रखा जिसने सहर्ष स्वीकार कर लिया। एकदम हीरो मार्का कैसानोवा टाइप लड़के की हर लड़की ख्वाहिश रखती है। अवीना को अपने सपने का हसीन राजकुमार मिल गया और अतुल को अवीना की दौलत मिल गई। अतुल अवीना के पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ गया और एक बढ़िया से फ्लैट में रहने लगा। बस में सफर करने वाले अतुल के पास अब दो चमचमाती कार हो गई। एक मर्सिडीज कार अवीना की और एक हौंडा सिटी कार अतुल की। अतुल मर्सिडीज कार में ही सफर करता। अतुल के पास अब हर सुख सुविधा थी जिस की अतुल की ख्वाहिश रखता था। विवाह के तीन वर्ष के अंदर अतुल और अवीना एक पुत्र और एक पुत्री के माता-पिता बन गए। पुत्र और पुत्री के जन्म के बाद अवीना बच्चों की परवरिश में व्यस्त हो गई। बच्चों के जन्म के बाद अवीना थोड़ी मोटी और हो गई लेकिन अतुल की खूबसूरती, बांका छैला पन पहले जैसा ही बरकरार था। व्यापार के सिलसिले में अनेक व्यक्तियों से मिलना होता था। अतुल ने घर पर ही एक ऑफिस बना लिया अक्सर व्यापारी, सलाहकार और कंसलटेंट घर वाले ऑफिस में आते रहते थे। अवीना भी खाली समय में ऑफिस में बैठ जाती थी हालांकि वह व्यापार देखती नही थी फिर भी अपनी सलाह दे देती थी। व्यापार में समस्त पूंजी अवीना की थी और कानूनी तौर पर मालिक भी वही थी इस कारण थोड़ा बहुत हस्तक्षेप अवीना का रहता ही था।

शाम के समय अवीना ऑफिस में बैठी आवश्यक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर रही थी तभी एक खूबसूरत युवती ने अतुल के बारे में पूछा।

"मिस्टर अतुल से मिलना है।"

उस युवती की आवाज सुनकर अवीना ने उसको देखा। गोरी चिट्टी लंबे कद की युवती गज़ब की खूबसूरत थी। युवती ने मिनी स्कर्ट पहन रखी थी और अंग पदर्शन भी कर रही थी। अवीना ने उससे नाम पूछा।

"आपका नाम?"

"शर्मिला।"

अवीना सोचने लगी कि नाम शर्मिला है लेकिन शर्म का कोई नाम नही। बदन दिखाऊ चुस्त कपड़े पहन कर अतुल से किस लिए मिलने आई है।

"आपको क्या काम है?"

"मुझे मिस्टर अतुल से मिलना है। मैं इंटीरियर डिज़ाइनर हूँ। मिस्टर अतुल ने बुलाया है।"

शर्मिला को बैठने का कह कर अवीना ने अतुल को फोन लगाया "अतुल कोई शर्मिला नाम की लड़की तुमसे मिलने आई है।"

"हाँ उसको बैठने को कहो। मैं ट्रैफिक में फंस गया हूँ। आधे घंटे तक आता हूँ।" घर में बने ऑफिस पहुँच कर अतुल बहुत आत्मीयता से शर्मिला से मिलता है "हाय शर्मिला कैसी है तू।"

शर्मिला अतुल के गले लग कर मिलती है "फाइन अतुल, कैसे हो थके हुए लग रहे हो?"

अवीना शर्मिला के अतुल के गले लगने पर क्रोधित होती है लेकिन अपना गुस्सा शांत रखती है और दोनों पर नजरें गड़ा लेती है।

"अवीना इनसे मिलो, ये शर्मिला है, इंटीरियर डिज़ाइनर है। मैं शिमला के पास जो जमीन खाली पड़ी है उस पर होटल बनाने की सोच रहा हूँ। शर्मिला हमारे नए फ्लैट का इंटीरियर कर रही है। काम पसंद आया तब पूरे होटल का इंटीरियर शर्मिला करेगी। शर्मिला मीट माई वाइफ अवीना।"

शर्मिला ने अवीना को देखकर कुछ नही कहा लेकिन मन ही मन सोचने लगी कि किस आइटम से अतुल ने शादी की है। कहाँ अतुल और कहाँ यह फुटबॉल। अवीना भी शर्मिला को देखकर सोचने लगी कि अतुल को कोई और इंटीरियर डिज़ाइनर नही मिला। यह इंटीरियर डिज़ाइनर है या आइटम गर्ल। शर्मिला के जाने के बाद अवीना ने अतुल को पकड़ लिया।

"अतुल इस आइटम गर्ल को कहाँ से पकड़ कर लाए हो। कोई और नही मिला था।"

"अवीना वह इंटीरियर डिज़ाइनर है उसके काम की कद्र करो। उसके कपड़ों को देख कर जलो मत, उसकी फिगर है वह ऐसे कपड़े पहन सकती है। उस पर जंच रहे थे। कपड़े उसके व्यक्तित्व को निखार रहे थे।"

"क्या बात है उसकी जम कर तारीफ हो रही है। ऐसे उत्तेजक कपड़े पहन कर ऑफिस के काम करते पहली लड़की देख रही हूँ। इसके साथ काम का ही मतलब रखना, गले लगने की जरूरत नही है।"

"अवीना तुम बेकार की बातें छोड़ कर उसका काम देखो।"

"वो तो देखना ही है।"

नए फ्लैट के इंटीरियर के सिलसिले में अवीना और अतुल का शर्मिला से अब हर दूसरे दिन मिलना होता था। शर्मिला अंग प्रदर्शित कपड़ों में आती तो अवीना के तन बदन में आग लग जाती।

"अतुल मुझे इस आइटम गर्ल से कोई काम नही करवाना है। तुम इसका हिसाब करके तुरंत कोई दूसरा इंटीरियर डिज़ाइनर नियुक्त करो। मैं उसकी शक्ल नही देखना चाहती हूँ।"

अवीना की धमकी के बाद अतुल ने शर्मिला को घर आने से मना कर दिया। वे घर से बाहर मिलने लगे। घर पर काम के लिए शर्मिला का पति सुभाशीष आने लगा।

"अतुल यह शुभाशीष अधिक अक्लमंद है। उस आइटम गर्ल से अधिक काम का अनुभव रखता है और सिर्फ काम की बात करता है। आइटम गर्ल से अधिक तो उसका नौकर काम जानता है।"

"अवीना वो नौकर नही है, सुभाशीष शर्मिला का पति है और कंपनी का मालिक है।"

"पति।" अवीना यह सुनकर आश्चर्यचकित हो गई। "बड़ा लल्लू सा पति है, उसका नौकर लगता है।"

"अवीना कंपनी का मालिक है वो सुभाशीष। शर्मिला तो नौकरी करती थी। दोनों ने शादी कर ली और अब कंपनी के क्लाइंट्स से शर्मिला मिलती है और काम तो सारा सुभाशीष ही करता है।"

"बड़ी बेमेल जोड़ी है। पैसे देख कर लल्लू से शादी कर ली।" अवीना ने मुँह बनाते हुए कहा।