... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

लेखक परिचय

संध्या रायचौधरी

कालेज के दिनों में व्यवस्थाओं पर चोट करते हुए पत्र संपादक के नाम पत्र लिखती थी, जो बाद में धीरे धीरे लेख की शक्ल बनते गए। इंदौर विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक उपाधि ली। इंदौर के प्रतिष्ठित अखबार नई दुनिया एवं दैनिक भास्कर में कई वर्षों तक कार्य किया।

उन दिनों रिपोर्टिंग, एडिटिंग, इंटरव्यूज करते हुए तात्कालिक विषयों पर खूब कलम चलती थी। किंतु मन के भावों को तब ही चैन मिलता था जब उन्हें कहानी और कविता की शक्ल में ढाल देती थी। अपनी साहित्यिक क्षुधा शांत करती थी पत्रिकाओं में कहानी लिखकर। इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी सक्रियता है। जिस बात को दिल गवारा नहीं करता उस पर तुरंत प्रतिक्रिया देती हूं। अच्छा लगता है कि आज लोगों का मानस मन बहुत सटीक और प्रबुद्ध हो गया है। सहमति और असहमति समानांतर चलते हैं तो विचारों का प्रवाह भी विस्तार पाता है।एक कविता संग्रह और  अब तक लिखे गए लेखों का एक संकलन भी किताब के रूप में तैयार हो रहा है। साहित्यिक यात्रा अनवरत जारी रहे ऐसी कामना है।

(संध्या रायचौधरी, इंदौर)

 संपर्क        sandhyarcroy@gmail.com