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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता गुप्ता की कविता

नारी तुम हो कितनी महान ,
जग जननी का श्रृंगार तुम्हें l 
मिट्टी से जैसे सोना उपजे ,
धरती सा कहें धनवान तुम्हें l

 

सीना सपाट वसुधा सम है ,
विशाल ह्रदय, सागर जैसा l 
छूने से छुई मुई बन जाती ,
यह शौर्य, शक्ति जादू कैसा ?

न कभी, अरि तुम्हारा कोई हो ,
न + अरि किसी की तुम बनना l 
झुक जाना कर्तव्य की बेदी पर ,
पर अन्याय, पाप में मत झुकना l

तुम्हें सीमा में बाँध दिया नर ने ,
पर तुम असीम की पर्याय बनो l 
ईश्वर की अनमोल धरोहर कहते , 
सुह्रदय, विचारक, सर्वश्रेष्ठ बनो l

 

 

Kavita Gupta

kavitagarg45@gmail.com
 

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