भूल गए तुमको ...

भूल गये तुमको यूँ बातों ही बात में हम 

इतने भीगे गम की बारिश-बरसात में हम 

 

ज़ुल्म -सितम इतना सहना पड़ता क्या जानो  

फिर छोटी कुटिया,फिर वो ही औकात में हम 

 

जिस हाल में हम हैं रहने दो बिल्कुल ऐसे  

बाद सही आधी के  रो लें  हालात में हम 

 

एक कहर लगती आज सजा सौ-सालो की 

काटे प्रति-पल कैदे-उमर हवालात में हम  

 

बचपन नावें कागज़ की कब तैरा करती

उस पर भी बह जाते कोरे जज्बात में हम   

 

 

 

सुशील यादव

Share on Facebook
Share on Twitter
Please reload

eKalpana literary magazine

​​Contact & Social Media -

ekalpanasubmit@gmail.com

सभी रचनाएं
ekalpanasubmit@gmail.com पर भेजें
Please reload

Please reload

 

... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

ई-मेल में सूचनाएं, पत्रिका व कहानी पाने के लिये सब्स्क्राइब करें (यह निःशुल्क है)