... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

“अधूरी जिंदगी” : कविता

अपनी अधूरी जिंदगी ले के,

 तुम्हारे पुरे ख्वाब चाहता हूँ ,

 मैं रुका तो दो पल था ,

 मगर साथ ता-उ-मर चाहता हूँ ,

 मैं अपनी अधूरी जिंदगी ले के

 तुम्हारे पुरे ख्वाब चाहता हूँ |

  ख़ुदगर्ज हूँ मैं

  ये भी जनता हूँ ,

 मगर फिर भी

 तुमसे ऐतराम पूरा मांगता हूँ ,

  मैं आज फिर से

 कोई पुकारे तो रुकना चाहता हूँ ,

 मैं अपनी अधूरी जिंदगी ले के

 तुम्हारे पुरे ख्वाब चाहता हूँ |

 

 

सम्पर्क  ई-मेल:-kuntalmohitpandey@gmail.com,

दूरभाष :-9956531043

 

Share on Facebook
Share on Twitter
Please reload

Archive
Please reload

Search By Tags
Please reload

Follow Us
  • Facebook Basic Square
  • Twitter Basic Square
  • Google+ Basic Square