... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

कुछ दिन पहले

कुछ दिन पहले इस किताब में, महक रहे थे बरक नये

जिल्दसाज तुम बतलाओ, वे सफे सुनहरे किधर गये

जहाँ इत्र की महक रवां थी,जलने की बू आती है

दहशत वाले बादल कैसे,आसमान में पसर गये

बूढ़ा होकर इंकलाब क्यों, लगा चापलूसी करने

कलमों को चाकू होना था, क्यों चमच्च में बदल गये

बंधे रहेंगे सब किताब में, मजबूती के धागे से

एक तमन्ना रखने वाले, बरक बरक क्यों बिखर गए

जिल्दों से नाजुक बरकों को, क्या तहरीर बचाएगी

क्या मजनून बदलने होंगे, गढ़ने होंगे लफ़्ज नए

 

 

डॉ कौशल किशोर श्रीवास्तव

171 विष्णु नगर परासिया मार्ग

छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश)

मोबाइल 09424636145

vishalshuklaom@gmail.com

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