... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

रविवार, नवाबों का शहर और मैं

रविवार का दिन ।

नवाबों का शहर ।

गीत ग़ज़लों के बीच शाम ।

है बहुत कुछ इस शहर की आबोहवा में ।

 

आजकल गंज में ट्रैफिक ज्यादा रहता है ।

मेट्रो का काम चल रहा है ।

फिर भी गंज तो गंज है ।

 

वही गुलजार और रोशन गली ।

और गलियों के किनारे ढेरों शोरूम्स ।

और ढेरों लोग ।

 

सब अपने में मशगूल ।

शोर भी है पर शान्ति भी ।

भीड़ भी है और तन्हाई भी ।

 

खामोशी से आगे बढ़ती गोमती नदी ।

हाँ, रिवरसाइड पार्क के पास ।

कुछ दिनों पहले यहाँ थी ढेरों जेसीबी मशीनें ।

 

एक तेज हवा का झोंका ।

अब बादल भी नहीं संभाल पा रहे ।

अपने साथ बूँदों का बोझ ।

 

बारिश का मौसम ।

नवाबों का शहर ।

रविवार का दिन और भी बहुत कुछ ।

हाँ, है बहुत कुछ इस शहर की आबोहवा में ।

-नितिन चौरसिया

मेरा नाम नितिन चौरसिया है और मैं चित्रकूट जनपद जो कि उत्तर प्रदेश में है का निवासी हूँ ।

स्नातक स्तर की पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से करने के उपरान्त उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय से प्रबंधन स्नातक हूँ । शिक्षणऔर लेखन में मेरी विशेष रूचि है । वर्तमान समय में लखनऊ विश्वविद्यालय में शोध छात्र के रूप में अध्ययनरत हूँ ।

 

फ़ोन -09453152897

ई-मेल - niks2011d@gmail.com

 

 

 

 

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