... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

बाबा रे बाबा

 

बाबाओं के नाम से देखो , कैसे सबको लूट रहे ।

भर चूका है पाप का घड़ा, अब तो भांडा फूट रहे ।

भोली भाली जनता को , अपने वश में करते हैं ।

अपने को भगवान बताकर, अपनी जेबें भरते हैं ।

लच्छेदार प्रवचन देकर, लोगों को खूब रिझाते हैं ।

गुरु मंत्र का नाम बताकर, अपनी जाल बिछाते हैं।

आलीशान बंगलों में रहकर, बाबा का ढोंग रचाते हैं ।

कृष्ण कन्हैया बनकर के, गोपियों को नचाते हैं ।

अय्याशी से भरा है जीवन, झूठे उपदेश सुनाते हैं ।

दुनिया को दिखावा करके, लोगों को भटकाते हैं ।

संभल जाओ ओ दुनिया वालों, फेर में इसके मत आओ ।

बाबा रे बाबा अब तो, इसके चाल से हमें बचाओ ।

 

- महेन्द्र देवांगन माटी पंडरिया छत्तीसगढ़ 8602407353

mahendradewanganmati@gmail.com

 

 

 

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