... ON BORROWING a BOOK VS BUYING IT

""When you buy it, you are promoting the literature of your country.""

भगवान

उस भगवान को मानना जो कभी दिखता नहीं ओर बार-2 यह सोचना कि एक दिन वह जरूर मिलेगा ये सोच कितने दिनों तक चल सकती है। पर अगर यह सोच हमेशा चले तो शायद वह भी मजबूर हो जाता है अपने भक्तों के पास आने के लिए, बहुत बार ऐसा हुआ जब मैंने उसे परखा। एक बार मैं मंदिर से दर्शन कर के बाहर निकल रहा था तभी एक भीखारी ने मुझसे कुछ पैसे मांगे मैंने कोट की जेब में हाथ डाला मेरे हाथ में 2,000 रुपये आ गए ओर ना जाने मैंने वह सारे रूपये उसे क्यों दे दिए। वह मेरी तरफ आशर्चय से देखने लगा मुझे भी अपने पर आशर्चय हो रहा था, अभी दो और दिन सैलरी के बाकी थे और मैंने ये क्या किया सारे पैसे एक गरीब को दे दिए। फिर सोचा मैं कौन हूँ जो ये सोच लूँ कि आज-ओर कल कैसी चलेगा ये तो भगवान ही चलाएगा ओर मैं यही सोच कर घर वापस आ गया, पर मुझे यह देखकर घबराहट हो गई कि घर में कुछ भी समान नही था और मेरी धर्म पत्नी ने जब मुझे यह बताया तो मेरे होश ऊड़ गए क्योंकि मैं अपने सारे रूपये तो उस गरीब को दे आया था, ओर अब दो दिन तक मैं घर कैसे चलाऊंगा क्योंकि दो दिन बाद तो मुझे मेरी तनख्वाह मिल जाएगी पर अगले दो दिन मैंने बहुत झिझकते हुए अपनी पत्नी को यह सच बता दिया कि मैंने क्या किया। पहले तो वह दुखी हुई पर फिर मेरे बोलने पर बोली चलो कोई बात नहीं। हम देखेगें कि तुम्हारा भगवान क्या करता है वह तुम्हारे लिए आएगा या नहीं ओर उसने बच्चों से कहा कि देखो हम दो दिन का व्रत रखेगें ओर दो दिन बाद तुम्हे खूब सारी चाकलेट मिलेगी बच्चे भी तैयार हो गए। दो दिन किसी तरह बीते पर भगवान नहीं आए। दोनो दिन मैं मंदिर गया और सारे रास्ते ये सोचता रहा कि शायद आज प्रसाद में पूरी मिल जाए। पर ऐसा नही हुआ जबकि जब मै पहले मंदिर जाता था तो मुझे पूजारी जी भर-भर के प्रसाद देते थे और मैं कहता था पूजारी जी थोड़ा कम कर दो पर इन दो दिनों में पूजारी जी ने प्रसाद के नाम पर मुझे दो दाने मिश्री के दिए। भगवान तो आया नहीं पर प्रसाद भी ले गया। पर मैं पिछले 20 वर्षों से लगातार मंदिर आता रहा ओर हर बार भगवान से यही कहता एक बार मुझसे मिल लो पर भगवान नहीं आए। आज मैं 50 वर्ष का हो गया। आज मेरा जन्म दिन था ओर आज फिर सोते-2 मैंने भगवान को कहा प्रभु एक बार तो मिल लो।

 

      रात के 12 बजे मुझे किसी ने उठाया। मैंने कहा कौन है। तभी आवाज आई भक्त मैं हूँ भगवान। भगवान यहाँ ये कैसे। भगवान ने कहा हाँ भक्त तुम्हारे निस्वार्थ प्रेम के कारण मुझे आना पड़ा तुमने मुझसे मिलने के अलावा कभी मुझसे कुछ नहीं मांगा। जबकि सभी भक्त मुझसे कुछ न कुछ मांगने के लिए ही मंदिर आते है पर तुम ऐसे नहीं हो। बोलो तुम्हें मुझसे क्या कहना है। मैं भगवान को देखकर हैरान था पर फिर मैं बोला प्रभु मुझे अपने लिए कुछ भी नहीं चाहिए तेरे दर्शन हो गए ये ही बहुत है पर, जब मैं पर यह कहकर रूक गया तो भगवान मुस्कुराए और बोले पर इंसान की इच्छा कभी नहीं जाती भक्त बोलो क्या चाहते हो। आखिर मैंने कहा प्रभु मैं चाहता हूँ कि मैं अपनी आखिर पुश्त को देख संकू कि मेरी आखिर पुश्त या आखि‍री संतान, कैसे जीती है और क्या करती है। भगवान फिर मुस्काए बोले भक्त जो भक्त मंदिर में मुझे जल चढ़ाने प्रशाद खिलाने आते है वह तो हाथ के हाथ ही मुझसे कुछ ना कुछ ले जाते हैं पर 20 सालों का ब्याज शायद तुम ही मुझसे ले रहे हो ये कितना कठिन है।

 

      मैंने कहा प्रभु कठिन है पर असंभव तो नहीं। भगवान कुछ देर चुप रहे ओर बोले
ठीक है भक्त पर तुम्हें मेरी कुछ बातें माननी होगी। मैंने कहा बताएँ प्रभू। भगवान बोले पहली यह कि तुम्हें मेरे दिए हुए पत्ते पर कल ही जाना होगा ओर घर पर जाकर अंदर से दरवाजा बंद करके चारपाई पर लेटना होगा। यह भी ध्यान रहे एक बार चारपाई पर लेटने के बाद तुम तभी उठोगे जब इस सृष्ट‍ि का आखिरी पड़ाव होगा। तुम्हें अपना घर-बार दुबारा देखने के लिए नहीं मिलेगा। मैंने कुछ सोचा फिर कहा ठीक है, प्रभू, वैसे भी बच्चे बड़े हो गए हैं अब नौकरी करते हैं ओर धन भी मैंने बहुत जमा कर लिया है। अपनी बीवी के लिए।

 

      दूसरी शर्त तुम किसी को यह नही बताओगे कि मैं आया था ओर तुम्हारी मेरे से बात हुई है। मैं हंस पड़ा और बोला प्रभु मैं इन इंसानों को कहूगाँ तो भी यह नहीं मानेंगे कि आप से मेरी बात हुई है।

 

      तीसरी शर्त मैं तुम्हें उस दुनिया मैं सिर्फ तीन वार मिलूंगा ओर तुम्हारे तीन ही सवालों के जवाब दूंगा चौथी बार मैं नहीं आऊंगा चाहे कुछ भी हो। मैने हाँ कर दी। कुछ पल भर बाद ही मेरी आँख खुल गई। मैंने समय देखा ठीक 4 बजे थे। मुझे समझने में देर नहीं लगी कि जरूर भगवान यहाँ आए थे ओर अगर ये सच है तो उनके कहने के मुताबिक आज मुझे उस मकान का पत्ता  भी मिल जाएगा जो भगवान ने मुझे कहा है।

 

      ओर ऐसा ही हुआ मंदिर में एक भक्त ने मुझे कहा भाई ये पत्ता जरा बताओगे, मैंने कहा भईया ये पत्ता तो यहाँ से 5 km दूर है ओर तुम पैदल कैसे जाओगे आयो मैं तुम्हें अपनी गाड़ी पर छोड़ दूं। पर पूजा करते-2 वह भक्त ना जाने कहां गायब हो गया।

      वो पत्ता मुझे मालूम था ओर मैं उस पत्ते पर पहुँच गया। घर का दरवाजा खुला हुआ था। मैंने अंदर जाकर दरवाजे को बंद कर लिया ओर सामने पड़ी चारपाई पर लेट गया।

 

      जब मुझे होश आया तो मैंने देखा मेरा पूरा घर गंदे जालों से घिरा हुआ था इतनी मिट्टी में, मैं कैसे सांस ले रहा था मुझे नहीं मालूम पर मुझे अब भी अपना सारा अतित मालूम था मैं यहाँ क्यों आया हूँ अपनी आखिरी पुश्त को देखने के लिए मिलने के लिए। किसी तरह मैं घर से बाहर निकला तो देखा दूर-2 तक एक भी घर नहीं है। जहाँ तक मेरी निगाह गई वहाँ पर कोई घर नहीं है ये कैसे संम्भव है जब मैं यहाँ आया था तो यहाँ शहर बसा हुआ था पर अब एक भी घर नहीं है। मैंने चलना शुरू किया शायद मैं 10 कि.मी. तक चला तब जाकर मैंने दो इंसानों को देखा लेकिन वह बहुत दूबले पतले थे। आम इंसानों से बहुत पतले। मुझसे रहा नही गया ओर मैंने भगवान को याद किया। भगवान उसी समय आ गये बोले भक्त क्या हुआ तुम क्या सोच रहे हो। मैंने कहा प्रभू यहाँ लोग कैसे रहते हैं कोई मकान दिखाई नहीं देता लोग इतने दूबले-पतले क्यों हैं, आखिर यह क्या हैं। भगवान बोले बेटा यहाँ इंसान अपनी चर्म सिमा तक तरक्की कर चुका है। आज यहाँ हर इंसान के पास एक चिप है जो हर इंसान ने अपने दिमाग में लगा ली है। चिप के लगने से ये दूसरे को अपने अनुभव से देखते हैं, जैसे अच्छे से अच्छे से कपड़ों में। अब इंसान को भुख भी नहीं लगती ना खून की कोई जरूरत ना बिमारी। सिर्फ हर अच्छे के लिए हर सुख के लिए एक चिप जो दिमाग के पास चिपकाते ही सारे सुख जो तुम मेहनत से कमाते थे यह चिप तुम्हें अनुभव कराने लग जाएगी। हर  जगह तुम्हें यहाँ से चिप बनाने वाले ही मिलेंगे मकान नहीं ओर बड़े से बडा आदमी वही है जिसके पास सभी अनुभव करवाने वाली चिप हो। अगर इंसान को लड़ना भी है तो वह हाथों से नहीं लड़ता बल्कि अनुभव करता है लड़ने का ओर जो ज्यादा अनूभव करता है वह जीत जाता है दूसरा हार कर फिर से एक नई चिप के लिए संघर्ष करता है और सबके साथ मिलकर एक नई चिप बनाने लगता है। जाओ ओर तुम भी एक चिप ले लो यह पहले चिप तुम्हें मैं दूगाँ पर यह चिप तमु तभी उतारना जब दूसरी चीप लेने के लायक हो जाओ अथवा बिना भोजन के कुछ ही दिनों में तुम मर जाओगे। अब भगवान चले गए।

 

      देखते ही देखते मेरे दिमाग पर भी एक चिप लग गई। अब मैंने उन दूसरों को देखा तो मुझे महसूस हुआ वह एक बहुत बड़े हेलीकॉप्टर से उतरे थे। ये दोनो बहुत सुंदर कपड़े पहने हुए थे। मैंने उनसे बात करनी चाहिए तो वह बोले मिस्टर हमें बहुत काम है। तुम किसी ओर से बात करो।

 

      मैं समझ गया कि कोई भी ऐसे ही अपनी चिप को खराब नहीं करेगा। जब तक की वह मुझे जानता ना हो आखिर ऐसे में मैं अपनी आखिर पुश्त को कैसे मिलूंगा कही ऐसा ना हो मैं उसे देख तो लूं पर पहचान ना सकूँ ओर मेरा यहाँ आना व्यर्थ ही चला जाए।

 

      थोड़ा ओर आगे चलने के बाद मैंने देखा कुछ लोग शायद लड़ रहे थे वह तेज-2 बोल रहे थे कि यह मैनें अनुभव किया, शायद किसी एक की चिप दूसरे ने ले ली थी, इस लिए झगड़ा चल रहा था। अब मैं उनके पास पहुँच चुका था मुझे अब महसूस हुआ कि पहले वह बहुत दूर थे पर जब मेरे मन ने उनके पास पहुँचने की कोशिश की तो मैं उनके पास पहुँच गया। मैंने एक बार फिर चिप को दिमाग से हटाया तो मुझे अहसास हुआ शायद मैं एक पल 50 से 100 किलो मीटर तक चल चुका था अब ये कैसा चमत्कार था यह बहुत ही अदभुत था पर ये तो सिर्फ शुरूआत थी। बातों-2 में पता चला कि कही पास में ही एक कारखाना है जहाँ पर चिप बनती है ओर ये सब आदमी वहां काम करते हैं मैंने कहा कि वह मुझे उस जगह वापिस ले चले जहां से वह आ रहे थे तभी वह लोग गायब हो कए। मैं समझ ही नहीं सका ये क्यों हुआ।

 

      मैं फिर सोचने लगा कि उनकी चिप कहीं खो गई ओर जब ये चिप सब कुछ कर सकती है तो फिर वह अपनी चिप ढूंढ क्यों नहीं सके पर मैं समझ नहीं पा रहा था तभी मैंने अपने पैर के पास एक ओर चिप गिरी देखी। मुझे समझने में देर नहीं हुई कि ये चिप उन लोगों की है। मैंने उसे उठाया ओर अपने दिमाग पर लगा लिया, जैसे ही मैंने उसे अपने दिमाग में लगाया मैं बहुत ही खुश होने लगा क्योंकि शायद मैं किसी पाँच सितारा होटल में पहुँच गया ओर वहां बहुत ही सुंदर-2 लोग मौजूद थे। मैं समझ गया कि ये, यह पहले वाली चिप से ज्यादा काम की है ओर कमजोर चिप बड़ी चिप को ढूढ़ं पाने में असम्भव होगी इसलिए लिए वह उसे हमें ढूंढ नहीं पा रहे थे।

 

      यहां लोग डांस कर रहे थे। शायद वहां नया साल बना रहे थे यहां पर रात थी पर जहाँ मैं पहले था वहां दिन था तो क्या मैं एक पल मैं एक से दूसरे देश में पहूँच गया था मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था मैंने एक बार फिर भगवान को याद किया।

 

      भगवान आ गए बोले भक्त तमु मुझे बार-2 बुला रहे हो ओर अब मैं केवल एक बार ही और आऊंगा। पूछो क्या पूछना है। भगवान जो आपने चिप दी थी ओर ये एक चिप जो मुझे मिली है, इसमें क्या फर्क है। मैं दिन से रात में कैसे पहुँच गया। भगवान बोले भक्त मैंने तुम्हें पहले ही वो कहा था कि इंसान अपने आखिर पड़ाव पर है जो ऐसी तरक्की कर चुका है। जहाँ महसूस करने से ही आप कुछ भी पा सकते हो। ये चिप बनी ही है सिर्फ ऐसा करने के लिए इसलिए पलक झपकते ही तुम एक देश ये दूसरे देश में आ गए। जबकि मेरी चिप सिर्फ कुछ दूरी तक ही असर करती यहाँ सिर्फ चिप से ही तुम अपनी आखिर पुश्त तक पहुँच पाओगे ओर एक बात ओर बता दूँ पूरी दुनियां में एक ही ऐसा कारखाना है। जहाँ पर दुनिया चलाने वाला है ओर वह अमर होना चाहता है वहीं पर तुम्हारी आखिर पुश्त मिलेगी अब ध्यान रहे मैं सिर्फ एक बार और आऊँगा पर याद रहे यहाँ किसी को किसी की परवाह नहीं है सब खव्वाब में जी रहें है। पर तुम यहाँ पूराने इंसान हो ध्यान रहें यह कह कर चले गये। पहले तो मैंने सोचा कि सीधे कारखाने चलूं पर ये चिप वहाँ पहुँचाने में शायद असमर्थ थी क्योंकि यह तो मौज-मस्ती वाली चिप थी मैंने जहाँ भी देखा लोग मौज-मस्ती कर रहे थे। अब मैं क्या करूं ये सोच कर मैं एक सभ्य लगने वाले व्यक्ति के पास पहुँचा ओर अपनी चिप के प्रभाव से उसे कहा कि वह यह मौज-मस्ती वाली चिप लेले ओर मुझे इस दुनियाँ के कारखाने पहुँचाने वाली चिप देदे। वह सहज ही मान गया और उसने मुझे एक दूसरी चिप दे दी मैं उसे लगाकर अब कारखाने में दाखिल हो चुका था यहाँ का नजारा जब मैंने देखा तो मैं हैरान रह गया।

 

शायद 10 हजार लोग एक साथ काम कर रहे थे सबके पास बड़े-बड़े औजार थे ओर एक बहुत छोटी चिप जमिन पर थी बिना छुए वह इसका परिश्रण कर रहे थे। मैंने दिवार के उस पार देखने की कोशिश की तो बहुत तेज झटका लगा। मैं समझ गया इस दीवार के पीछे ही वह दूनियाँ की चालाने वाला रहता है पर मुझे यह समझ नहीं आया कि आखिर ये लोग उस राजा के लिए ऐसा क्यों कर रहै है जबकि ना तो इन्हें पैसे चाहिए ना ही भूख लगती है ओर ना ही इन्हें किसी मकान की जरूरत है तो फिर ऐसा क्यों कर रहे हैं ये यहाँ से चले क्यों नहीं जाते।

 

मैंने वहाँ के लोगों के दिमाग को पढ़ने के लिए उनकी तरफ देखा तो मुझे पत्ता चला कि यह लोग 200 सालों से यहाँ हैं ओर अभी 100 से 150 साल तक जीवित रहेंगे अगर यह यहाँ से भागना चाहे तो सिर्फ वो राजा कि कृपा से ही जा सकते है और जो लोग बाहर भी हैं वह भी सिर्फ राजा द्वारा दी हुई निश्‍चित समय सीमा के लिए जाते हैं आखिर बारी बारी से सभी को यहाँ काम पर आना है यही राजा का आदेश है उफ आखिर इस राजा के पास इतनी शक्ति कहाँ से आई कि वह सब से अपनी बात मनवा लेता है। एक बार फिर मैंने अपने बारे में सोचा कि अब इस दुनियाँ से तो मुझे क्या, पर मरने से पहले में जिस काम के लिए आया हूँ वह क्यों नहीं कर लेता अब मैं अपनी आखिरी पुष्त को देख लूँ। पर बहुत खोजने पर भी मुझे कोई ऐसा ना लगा कि वह मेरी आखिर पुष्त है। आखिर मैं एक बार। फिर भगवान को याद करने लगा।

 

भगवान फिर आ गए बोले भक्त क्या हुआ। मैंने कहा प्रभु आप तो भगवान है, तो फिर इस तरह कि दुनिया को क्यों चलने दे रहें हैं। आप सब कुछ ठीक कर सकते हैं। भगवान बोले बेटा जब घोर कलयुग था तब भी मैंने तुम लोगों पूरा जीने का मौका दिया था ओर आज जो युग है इससे भी में तुम्हें ओर इन्हें पूरा मौका जिने का दूँगा। जो भी करता है वह ये खुद करेंगें मेरे द्वारा कुछ नहीं होगा। मैंने कहां प्रभु वह सब तो ठीक है पर अब आप मुझे यह बताइए कि मेरे आखिर पुष्त कहाँ है। जिससे मैं उससे मिल सकूँ। भगवान बोले  भक्त ये आखिर बार मैं तमसे मिल रहा हूँ इसके बाद तुम्हारे कितने भी चाहने पर मैं नहीं आऊंगा। तुम्हारी आखिर पुष्त ये राजा की ही ये दुनियाँ में अमर होना चाहता है ओर यह छोटी सी चिप पर जो काम चल रहा है ये ही अमर चिप बनेगी अब तुम्हें ही इसे व्यर्थ करना होगा अपनी आखिर पुष्त को यह पाप करने से बचाना होगा। मैंने कहा प्रभु आप मुझे भगवान कम किसी फिल्म के डेरेक्टर ज्यादा लग रहे हैं, जो मूवी मैं मुझे हीरो साबित करना चाहते हैं, पर यह सब मैं नहीं करूगाँ मैं तो अपनी आखिर पुष्त को देख कर यहाँ से दूर चला जाऊँगा। भगवान बोले बेटा यहाँ आना तो आसान है पर तुम अपनी मर्जी से जा नहीं पायोगे। एक बार मैं फिर से कहता हूँ कि अपनी संतान को बचाना हमेशा हमारा कर्तव्य रहा है ओर यह राजा तुम्हारी पीढ़ि‍यों की आखिर संतान है। यह कह कर भगवान वहाँ से चले गए।

 

      अब मुझे पता चल गया कि मेरी आखिर पुष्त यह राजा है पर मैं उसे कैसे देखूगाँ अब यह बात ही मेरे जहन में आ रही थी। तभी राजा खुद ही सामने आ गया ओर सबने हाथ उठाकर उसका अभिनन्दन किया। सिर्फ मेरे हाथ ना उठाने पर वह मुझे घूरने लगा। मैंने भी उसे जी भर देखा ओर लगा हाँ कुछ-2 यह मुझसे मिलता है तभी मेरे जहन में उसने कहा कौन हो तुम ओर यहाँ कहाँ से आए। मैंने पहले तो उसका स्वागत किया फिर बोला सच कहूं या झूठ। वह बोला झूठ बोला तो मारा जाऊंगा। मैं हँस पड़ा। मेरे हँसने पर वह बहुत गुस्से में आ गया यह देखकर मैं बोला। देखो मैं तुम्हारा पूर्वज हूँ ओर तुम मेरे आखिरी संतान हो। यह सुनकर अब वे हँसने लगा। मैंने फिर कहना शुरू किया कि मैं यहाँ कैसे आया हूँ ओर मैं किसी का अहित नहीं करना चाहता मैं तुम्हें देखना चाहता था सो देख लिया पर अब मेरी इच्छा है कि मै तुम्हारे बारे में ओर बहुत कुछ जानू।

 

वह बोला मैं अपनी शक्ति से तुम्हारे दो साल पीछे के देख सकता हूँ ओर मुझे पता चल जाएगा कि तुम सच कह रहे हो या झूठ। तब उसने मेरा सब अतीत देख लिया सिर्फ भगवान से बात करना वह नहीं देख पाया। अब उसे भी पूरा यकिन हो गया कि वे मेरा वंशज है।

मेरे बारे में जानने के बाद वह बोला हाँ तुम्ही मेरे पूर्वज हो इसलिए तुम यहाँ बे रोक टोक घूम सकते हो पर तुम मेरा कुछ भी बिगाड़ नहीं पाओगे क्योंकि ये शक्ति मैंने बड़ी मेहनत व अक्कल से प्राप्त की है। यह कहकर वह चला गया। मुझे समझ नहीं आ रहा ता कि मैं उसे यह कैसे समझाऊं कि वह जो भी कर रहा है वह ठीक नहीं है वह पूरी दुनियां का राजा था जबकि मैं एक आम आदमी।

वहाँ रात हो या दिन कोई फर्क ही नहीं पढ़ता था क्योंकि सभी सिर्फ चिप लगा के मजा लेते थे। मैं शायद तीन दिन तक सोचता रहा कि मैं कैसे उसको समझाऊगाँ आखिर मैंने सोचा भगवान क्या चाहते थे। भगवान चाहते थे कि मैं ये आखिर चिप को खराब कर दूँ तो फिर क्या है। मैं इसे अभी खराब कर देता हूँ ओर से सोचकर जैसे ही मै उठा मेरे आगे-पीछे चार पाँच लोग मूझे दिखने लगे ओर वह बोले तुम्हारे सोचते ही हमें पता चल जाएगा की तुम क्या चाहते हो तो फिर तुम यहाँ कुछ नहीं कर सकते। तभी राजा ने मेरे दिमाग में एक बार फिर घंटी बजाई ओर कहा यहाँ इतनी तरक्की हो चुकी है कि तुम जो सोचोगे वो हमें पत्ता चलता रहेंगा कोई आदमी मेरे बीना कुछ भी यहाँ नहीं कर सकता ये चिप बनकर रहेगी। इसे कोई नहीं रोक सकता दुनियाँ में लोग आएंगे-जाएगें पर मैं अमर हो जाऊंगा और  वह हसँने लगा।

 

ऊफ मुझे अपने पे गुस्सा आ रहा था कि मैं इतने वर्षों तक यह देखने के लिए जिंदा रहा कि मेरी आखिर पुष्त यह कार्य करेगी। मैंने फिर भगवान को याद किया लोकिन भगवान नहीं आए। अब मैं समझ गया कि अब भगवान भी मदद के लिए नहीं आएगें,  मुझे अपनी मदद स्वंय ही करनी होगी ओर यह सोच कर मैं ओर दुखी होने लगा। आखिर मेरे मन में ख्याल आया कि सबसे पहले मैं ये चिप निकाल कर फैंक दूँ तो फिर मेरे दिमाग को कोई नहीं पढ पाएगा मैंने ऐसा ही किया और चिप निकाल कर फैंक दी पर मैं बहुत देर तक यहाँ ऐसे बिना चिप के नहीं रह सकता था कई दिनों से मैंने कुछ भी नहीं खाया था। अब मैंने सोचा क्यों ना पेट भर कर खा लिए जाए आखिर मुझे एक अमरूद का पेड़ मिल गया बस अब मैं समझ गया कि मुझे क्या करना है मैंने अपना पेट अमरूद खाकर भर लिया ओर जब मैं वापिस लौटा तो फिर से राजा मेरा इंतजार कर रहा था। वह बोला क्यों पूर्वज चिप उताकर कहा चले गए मैंने कहा कि खाने के लिए चला गया था। वह बोला कैसा लगा मैंने कहा बहुत दिनों बाद खाया है अच्छा लगा। वह बोला ठीक तुम्हें जब तक जो ठीक लगे खाओ पियो मैं तुम्हारे खाने का इंतजाम कर देता हूँ पर इस चिप को खराब करने कि मत सोचना क्योंकि इसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ, सैकडों सालों से मैं यही कर रहा हूँ बस अब मंजिल नजदीक है। रात को सोते हुए मुझे ख्याल आया कि क्यों ना इन सब चिप की पावर को इक्कट्ठा करके मैं उस चिप पर वार करूं तो शायद कुछ हो सके लेकिन ऐसा करना बहुत मुश्किल था। पहला तो हर एक से चिप लेकर हर एक को जीवित रखना फिर उनके खाने का प्रबन्ध करना यह सब बहुत मुश्किल काम था, पर मुझे एक ख्याल आया। सुबह होते ही मैंने उन सब काम करने वालों को किसी तरह से अमरूद खिला दिए ओर फिर ये रोज होने लगा। कि वह अमरूद खाने के इंतजार करने लगे। आखिर ऐसा ही हुआ मैंने एक दिन सभी की चिप उतार ली ओर फिर उन सबकी सुपर चिप में बदलकर उस अमर चिप पर वार किया पर ये क्या हुआ हमारी सभी चिप खराब हो गई ओर अब किसी के पास चिप नहीं थी उधर राजा भी आ गया। उसने अमर चिप पर वार देखा तो घबरा गया उसने वो चिप देखी लेकिन शायद वह अमर चिप अब खराब हो गई थी वह रोने लगा ओर मुझे कोसने लगा मैंने उसे गले लगा लिया ओर उसे अमरूद दिया। मैंने कहा बेटा इंसान हो भगवान बनने की भूल मत करो ओर मेरी आँख खुल गई। मैं उसी चारपाई पर लेटा था जहाँ से आया था, मैंने सोचा क्या यह एक सपना था या मैं वो भगवान का काम कर आया था जो मुझसे वह करवाना चाहता थे।

 

      मैंने भगवान को बहुत याद किया और मंदिर में दीपक भी जलाए  पर भगवान फिर कभी नहीं आये मैं रोज इसी उम्मीद पर मंदिर जाता हूँ कि शायद वह मुझे मिल जाएं तो मैं उससे पूछूँ कि यह सब क्या था पर ऐसा हो नहीं पा रहा था। बस मैं पहले जैसी उम्मीद पर उसके मिलने की उम्मीद पर जीता जा रहा था किसे बताऊं यह सब हकीकत है ओर इस दुनिया में कौन मानेगा यह सब जो हुआ सब सच है।

 

हर्ष सेठ सम्पर्क

 hks2528@rediffmail .com
दूरभाष न. 9911277762,

seth@ttkhealthcare.com

 

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