आकर्षण

यूं तो आत्ममुग्धता अभिषेक के स्वभाव में कभी नही थी, पर अपने व्यक्तित्व की भव्यता से वो अनजान हो, ऐसा भी नही था।
एक ऐसा व्यक्तित्व, जिसमे, शालीनता,स्मार्टनेस,
खूबसूरती, सभी परिलक्षित होती।सोने में सुहागा ये कि व्यवहार कुशल और कार्य कुशल भी।
उनसे मिलने वाले उनसे प्रभावित हुए बिना न रह पाते।
उम्र यूं तो58 वर्ष,पर उम्र को छलावा देना भी उन्होंने खूब सीखा था। कोई देखकर भी उन्हें 45 वर्ष से अधिक का नही कह सकता था।
पेशे से इंजीनियर, रिटायरमेंट के करीब,लेखन में पारंगत,उनके फिल्मी गाने और गज़लें भी महफ़िल की रौनक हुआ करती।
सामाजिक रूप से सक्रिय, अभिषेक ऑनलाइन ज़िंदगी मे भी, आभसी दुनिया के एक लोकप्रिय व्यक्ति थे।
उनके चुटीले व्यंग, कविता, कहानी उनकेआभासी दुनिया के मित्रों के बीच, उनको लोकप्रिय बनाये हुए थे। 28, और 30 वर्षीय बेटा और बेटी अपने अपने कार्य क्षेत्र में व्यस्त थे।
हाँ! इधर उनके जीवन मे, एक भूचाल लाने वाली घटना घटी।
उनकी पत्नी एक ऐसी लाइलाज़ बीमारी की गिरफ्त में थीं, कि उनकी मृत्यु निश्चित थी।30,32 वर्ष का साथ यूं ही छूटा जा रहा था।पर साहसी अभिषेक, अपने इस दुख की छाया भी अपने चेहरे पर न आने देते।
उनके कथा, कविता, लिखने का क्रम यूं ही जारी रहा। इसी बीच कई मित्रो के बीच उनकी मुलाकात हुई नूपुर से।
उनकी पुत्री की आयु की नूपुर---।ताज़गी,और मासूमियत से भरपूर नूपुर उन चंद मित्रों में से थी
जिससे बात कर,जिसकी रचनाएँ पढ़, उनको स्वयं भी एक ताज़गी महसूस होती।
पर वो उस दिन ताज़्जुब में पड़ गए जब नूपुर ने
उनको एक दिन फ़ोन मिलाया।
गजब का उत्साह था उसकी आवाज में, हेलो
अभिषेक( कहीं खटका उसका ये अभिषेक कहना) मैं कितनी उत्सुक हूँ तुमसे मिलने को
इस बीच अभिषेक उसको अपनी पत्नी की बीमारी की सूचना दे चुके थे। ओह! तो अवश्य कहा उसने पर आवाज़ से साफ जाहिर था कि उसे सिर्फ अभिषेक से ही मतलब था।
अभिषेक भी उसकी नादानियों को नज़रंदाज़ कर देते, ये सोच , छोटी है, इस उम्र में ये क्रश हो जाय करते हैं।
वो मित्रवत व्यवहार करते रहे उससे, अक्सर दोनों के बीच बात हो जाती, कभी किसी कहानी को लेकर डिस्कशन या कभी किसी कविता को लेकर।
बिना देखे, बिना मिले सिर्फ ऑनलाइन बातें कर,
एक अजीब सा आकर्षण था दोनों ओर।
पर जो बात अभिषेक को नूपुर की सबसे ज्यादा खटकती, वो उसका उनको अभिषेक कहना।
वो इस बात के लिए कई बार चैटिंग के दौरान टोक भी चुके थे।पर नूपुर थी कि उनका कोई तर्क सुनने के लिए न तैयार थी।
दोनों के पास एक दूसरे के व्हाट्स एप नंबर भी थे, अक्सर उनकी बातें हो जाती।
आज भी कुछ ऐसा ही हुआ।
हाय अभिषेक, नूपुर दिस साइड,----
नूपुर, कैसी हो?
मैं? बहुत प्यारी प्यारी सी----, और एक खनखनाती सी हंसी।
पृत्युत्तर  में अभिषेक भी हंस दिया।
पता है नूपुर, में तुम्हारी पिता की उम्र का हूँ।
पता है उधर से नूपुर का जवाब आया।मैं कोई 16 वर्ष की लड़की नही हूँ। सर्विस करने वाली 25 वर्षीय सुंदरी हूँ, वो पुनः खिलखिलाई।
ऐसे समय अभिषेक अपने को बहुत असहाय महसूस करते। पर भी पता नही क्यों ये नूपुर उन्हें अपने लिए चैलेंज सी लगती।
इस लड़की की सोच को वो बदल कर ही रहेगा।
इस बीच पत्नी का देहांत हो जाने के कारण वो
कुछ दिन ऑनलाइन न रह सके।
कुछ दिनों बाद एक दिन पुनः इनबॉक्स में हाज़िर थी। हाय! दुखद समाचार पता चला, अब कैसा फील कर रहें हैं आप?
ठीक हूँ नूपुर।
एक बात पूछूँ, अभिषेक, ? इस बार नूपुर ने पूछा,
हाँ पूछो?
आप मुझे लेकर क्या सोचते हैं?
मतलब? अभिषेक ने पूछा?
---- मतलब, मैं आपको किसी लगती हूँ?
उसका अभिप्राय समझते हुए भी, अभिषेक ने कहा, गुड़िया सी, प्यारी सी, छोटी सी , मेरी मित्र----
आगे वो क्या कहने जा रहा था, समझते हुए नूपुर ने उसे बीच मे ही रोक दिया, शुरू से ही?
हाँ! शुरू से ही--
ये सुनते ही नूपुर क्रोध में ऑफ लाइन---
पर एक ही घंटे में उसके पास नूपुर और उसके परिवार के 10,15 फोटोग्राफ हाज़िर थे।
अभिषेक समझ नही पाते, इस लड़की को कैसे समझाएं।नफरत करने वाले को तो आदमी अपनी ज़िंदगी से निकाल सकता है। पर प्यार करने वाली को---
क्या सचमुच इतना आसान था, उसको अमित्र कर अपनी ज़िंदगी से निकल देना।
कुछ दिनों बाद ही नूपुर का जन्म दिन था।
अभिषेक ने दोपहर में उसे विश भी किया।
उस दिन पहली बार नूपुर ने पूरे ग्रुप के सामने अपना आक्रोश व्यक्त किया।
अभिषेक ने उसे फ़ोन मिलाया, हेलो नूपुर,
क्या हो रहा है?
" मैं रो रही हूँ" , क्यों?
सुबह से सबके फ़ोन आ चुके हैं, पर जिस फ़ोन की मैं प्रतीक्षा कर रही थी----
अभिषेक को लगा, अब पानी सर के ऊपर जा रहा है, और भारी मन से उसने नूपुर को अमित्र करके ब्लॉक भी कर दिया।
एक दो महीने यूं ही गुज़र गए।उसे कभी कभी वो प्यारी सी झक्की लड़की याद भी आती। और अपने द्वारा ब्लॉक करके उसका वो अपमान--
अभिषेक के बहुत जोर देने पर उसने उन्हें एक - दो बार अंकल संबोधित भी किया था।पर वो
"अंकल" की मजबूरी उसकी लिखावट में भी साफ झलक जाती।
अभिषेक ने उसे अनब्लॉक करने का फैसला लिया। अनब्लॉक करते ही उनके मोबाइल पर कॉल---
हेलो अभिषेक! कैसे हैं आप?
ठीक हूँ, इस समय परिवार के साथ मूवी देखने
आया हूँ----
ओ. के. एन्जॉय----, फ़ोन कट चुका था।
अब वो पुनः मित्र थे। हांलाकि उनके बीच की चैटिंग समाप्त हो चुकी थी। पर नूपुर की पोस्ट्स से अभिषेक को उसकी सोच की झलक मिल ही जाती, और वो बेचैन हो उठते, क्या करूं??
  उसी बेचैनी में वो लॉन में आये। पड़ोस के खाली मकान के सामने एक ट्रक आकर रुका था
और उसमे से सामान उतर रहा था।
कोई नई महिला एस. डी. एम थी। उनका चपरासी फ्रिज का ठंडा पानी मांगने आया था।
औपचारिकता वश वे स्वयं गए ताकि उनलोगों को रात के खाने के लिए कह सकें।
और दरवाजा खुलते ही नूपुर----
छन्न से कुछ हुआ दिमाग मे। नूपुर ,एस डी एम?
नूपुर भी उन्हें देख हैरान और प्रसन्न।
  अब शायद अभिषेक के दिमाग मे एक विचार जन्म ले चुका था। पहले क्यों नही आया समस्या का इतना अच्छा समाधान, वो सोच कर मुस्कुरा दिए
बेटी की शादी कर चुके थे पर बेटा विवेक?
होली का अवसर पास था।विवेक को घर आना ही था। उनका हैंडसम बेटा! पड़ोसी होने के नाते उनका मिलना भी आसान था। सब कुछ उनके सोचे के ही अनुसार घटित हुआ।
नूपुर की फ्रेंड लिस्ट में एक और नाम जुड़ चुका था, "विवेक"
और अभिषेक को जब विवेक की तरफ से भी एक सकारात्मक रुझान नज़र आया तो एक दिन वो नूपुर के घर हाज़िर थे। विवेक और नूपुर की इंगेजमेंट की रस्म करने।
विवेक के नूपुर को अंगूठी पहनाते ही, पहली बार अभिषेक ने, शरारती नज़रों से नूपुर को देखा।
एक झेंप भारी मुस्कुराहट उसके चेहरे पर थी।
      मुस्कुराते हुए अभिषेक ने, अपनी बाहें फैला दीं, झिझकती हुई नूपुर उन बाहों में----
और धीमे से बोली, पापा!
अभिषेक के सर से एक बोझ उतर चुका था और वो खिलखिला कर उन्मुक्त स्वर में गा उठे, "पहला नशा, पहला खुमार,----
विवेक और नूपुर की मम्मी हैरानी से उन्हें देख रहे थे।

रश्मि सिन्हा - परिचय

 
 
rashmisahai.sinha@gmail.com
MA राजनीति शास्त्र
परिचय- एक सामान्य शिक्षित गृहणी से लेखन तक का रोचक सफर।
कुछ समाचार पत्रों, "समाज्ञा , कोलकाता और अन्य में लघु कथाएं प्रकाशित, उद्गार नाम से एक कविता संग्रह, और अनगढ़ नाम से एक लघु कथा संग्रह प्रकाशित।
वनिका पब्लिकेशन से सांझा लघु कथाओं के संग्रह, "बूंद-बूंद सागर ,और "क्षितिज अपने अपने,में अनेकों लघु कथाएं प्रकाशित।
के. जी पब्लिकेशन के सांझा संग्रह"खनक आखर की" में अनेक कविताएं प्रकाशित।

 

 
 
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